सेराज अहमद ने 9 लोगों पर लगाया जबरन कब्जा करने का आरोप, प्राथमिकी दर्ज करने की मांग
रामगढ़ कैंट, झारखंड : गांधी चौक स्थित छावनी परिषद के सार्वजनिक शौचालय के बगल की विवादित जमीन का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। एक नवंबर को इस जमीन की घेराबंदी और चहारदीवारी का निर्माण शांतिपूर्वक करा लिया गया था। उस समय किसी तरह का विरोध या हंगामा नहीं हुआ था, लेकिन जमीन पर मालिकाना हक को लेकर विवाद अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। इस मामले में पांच नवंबर को सेराज अहमद ने रामगढ़ के उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर कथित रूप से जबरन जमीन पर कब्जा करने, निर्माण कार्य कराने और धमकी देने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। सेराज अहमद ने अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा के लिए सरकारी सुरक्षा गार्ड मुहैया कराने की भी मांग उपायुक्त से की है। आवेदन में नौ लोगों के नाम भी दर्ज कराए गए हैं, जिनमें कुछ मीडिया कर्मियों के नाम शामिल है।
एक नवंबर की सुबह चार बजे जमीन पर कब्जा करने का आरोप
उपायुक्त को दिए गए आवेदन में सेराज अहमदने बताया है कि वह मुस्लिम परिवार से संबंधित हैं और गांधी चौक के समीप रामगढ़ थाना रोड के मुख्य मार्ग पर स्थित जमीन उनके परिवार की पुश्तैनी संपत्ति है। उनका आरोप है कि एक नवंबर 2026 की सुबह करीब चार बजे 30-40 लोग वहां पहुंचे और उनकी जमीन पर जबरन कब्जा करने की कार्रवाई शुरू कर दी।
आवेदन के अनुसार, देखते ही देखते वहां लगभग 200 से 250 लोगों की भीड़ जमा हो गई। आरोप लगाया गया है कि जमीन पर तीन ट्रैक्टर मिट्टी, चार ट्रैक्टर बालू, 20 बोरा सीमेंट और मिक्सर मशीन के साथ निर्माण कार्य की तैयारी की गई। इसके अलावा 25 से 30 मजदूरों को भी काम पर लगाया गया था। आवेदनकर्ता का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों के जुटने और हथियारबंद लोगों की मौजूदगी से इलाके में दहशत का माहौल बना दिया गया तथा जमीन की घेराबंदी कर लोहे का गेट लगा दिया गया।
विरोध करने पहुंचे तो गाली-गलौज और मारपीट की धमकी का आरोप
आवेदन में शेख अख्तर ने आगे आरोप लगाया है कि वह कुछ लोगों के साथ अपनी जमीन पर पहुंचे तो वहां मौजूद लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज की और मारपीट करने की धमकी दी। उन्होंने कहा है कि उन्हें वहां से हटने के लिए कहा गया और दोबारा आने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई।
आवेदनकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि इस घटना से पहले भी संबंधित जमीन के मामले में कथित रूप से फर्जीवाड़े के जरिए जमीन का सौदा करने की कोशिश की गई थी। उनका आरोप है कि जमीन पर कब्जा करने के लिए जाली दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।
थाना में आवेदन देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने की शिकायत
शेख अख्तर के अनुसार, उन्होंने एक नवंबर 2026 को ही रामगढ़ थाना पहुंचकर घटना के संबंध में आवेदन दिया था। लेकिन पांच नवंबर तक थाना प्रभारी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आवेदन में आरोप लगाया है कि जमीन पर कब्जा करने की कोशिश में शामिल लोग आपराधिक प्रवृत्ति के हैं। घटना के दिन उनके द्वारा थाना प्रभारी को सूचना दिए जाने के बावजूद कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
इसी को लेकर उन्होंने उपायुक्त से मामले में हस्तक्षेप करने और संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की है। साथ ही आवेदन की एक प्रति पुलिस अधीक्षक, रामगढ़ को भी भेजने का अनुरोध किया है।
आवेदन में नौ लोगों के नाम दर्ज
उपायुक्त को सौंपे गए आवेदन में शेख अख्तर ने जमीन पर कथित रूप से कब्जा करने और घटना में शामिल होने का आरोप लगाते हुए नौ लोगों के नाम दर्ज कराए हैं। आवेदन में दर्ज नाम इस प्रकार हैं—
1. दिनेश सिंह – पिता स्वर्गीय नन्हे सिंह, निवासी पतरातू बस्ती, रामगढ़ कैंट, थाना रामगढ़।
2. सिद्धार्थ मेहता – पिता बसंत मेहता, निवासी बाजारटांड़, दिनेश स्टील रोड, रामगढ़।
3. अमरेश गणक – पिता सतकोड़ी गणक, निवासी गोलपार, वार्ड संख्या-1, रामगढ़ कैंट।
4. सुरेश गणक – पिता सतकोड़ी गणक, निवासी गोलपार, वार्ड संख्या-1, रामगढ़ कैंट।
5. नरेन्द्र मुंडा – पिता शिव मुंडा, निवासी मुंडा टोला, रामगढ़ कैंट।
6. सिंह – पिता स्वर्गीय अवधेश सिंह, निवासी पुरानी मंडप, गोलपार, रामगढ़ कैंट। (आवेदन में पूरा नाम स्पष्ट नहीं है।)
7. मुकेश सिंह – पिता स्वर्गीय अवधेश सिंह, निवासी पुरानी मंडप, गोलपार, रामगढ़ कैंट।
8. धर्मेन्द्र पटेल – पिता श्री अशोक कुमार पटेल, निवासी जायसवाल कॉलोनी, रामगढ़ कैंट।
9. दीपक साहू – पिता चन्द्र प्रसाद साहू, निवासी सतकोड़ी नगर, गोला रोड, रामगढ़ कैंट।
आवेदनकर्ता ने इन सभी लोगों को जमीन पर कथित कब्जे की घटना से जुड़ा बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और नामजद लोगों का पक्ष भी सामने नहीं आया है।
जमीन पर मालिकाना हक को लेकर पहले भी उठ चुका है विवाद
गौरतलब है कि गांधी चौक पर छावनी परिषद के शौचालय के बगल स्थित इस जमीन की घेराबंदी एक नवंबर को कर दी गई थी। इस दौरान निर्माण कार्य शांतिपूर्वक संपन्न हुआ और कोई बड़ा विरोध या विवाद सामने नहीं आया। हालांकि, उसी दिन एक तीसरे पक्ष की ओर से थाना प्रभारी को आवेदन देकर जमीन पर अपना दावा जताया गया था। उस पक्ष का कहना था कि जमीन की वर्ष 2026-27 की अद्यतन राजस्व रसीद उसके नाम से निर्गत है।
अब उसी पक्ष की ओर से उपायुक्त को दिए गए नए आवेदन में जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाते हुए नौ लोगों के नाम सामने लाए गए हैं। इनमें कुछ ऐसे नाम भी बताए जा रहे हैं, जो स्थानीय स्तर पर मीडिया से जुड़े हैं। इस सूची में जमीन पर दावा करने वाले एक पक्ष से संबंधित व्यक्ति का नाम भी शामिल बताया गया है।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
एक ही जमीन पर अलग-अलग पक्षों की ओर से मालिकाना हक का दावा किए जाने और एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने से मामला और पेचीदा हो गया है। एक तरफ राजस्व रसीद के आधार पर जमीन पर अधिकार का दावा किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ इसे पुश्तैनी संपत्ति बताते हुए जबरन कब्जा करने का आरोप लगाया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जमीन के वास्तविक मालिकाना हक का निर्धारण कैसे होगा और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाएगा? क्या जिला प्रशासन राजस्व अभिलेखों की जांच कर जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा? क्या थाना में दिए गए आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज होगी? फिलहाल गांधी चौक की इस चर्चित जमीन को लेकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ पूरे मामले से जुड़े पक्षों की निगाहें उपायुक्त और पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।