गांधी चौक की विवादित जमीन पर चहारदीवारी, कब्जे को लेकर फिर गरमाया मामला ; तीसरे पक्ष ने भी ठोका दावा

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रामगढ़ कैंट (झारखंड) : रामगढ़ शहर के गांधी चौक स्थित छावनी परिषद के शौचालय के बगल की चर्चित जमीन पर आखिरकार चहारदीवारी कर दी गई। जमीन की घेराबंदी के बाद एक बार फिर इस भूखंड के स्वामित्व और कब्जे को लेकर विवाद गहरा गया है। खास बात यह है कि जिस जमीन को लेकर पहले दो पक्षों के बीच विरोध और शिकायत के बाद काम रुक गया था, उसी जमीन पर अब चहारदीवारी खड़ी हो चुकी है। वहीं, इस बार एक तीसरा पक्ष भी सामने आ गया है, जिसने जमीन पर अपना दावा पेश करते हुए राजस्व रसीद और न्यायालय के आदेश का हवाला दिया है।

स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चर्चा में रही इस जमीन पर कई पक्ष अपना-अपना दावा करते रहे हैं। करीब दो महीने पहले भी जमीन की घेराबंदी का प्रयास किया गया था। उस समय एक पक्ष ने इसका विरोध करते हुए उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी, जिसके बाद निर्माण कार्य रुक गया था। उस दौरान न्यायालय के आदेश का हवाला देकर चहारदीवारी कराने पहुंचे पक्ष को पुलिस ने संबंधित न्यायालय का उचित आदेश प्रस्तुत करने और स्थानीय न्यायालय से आदेश प्राप्त करने के बाद ही जमीन पर आने की बात कही थी। इसके बाद मामला शांत हो गया था।

लेकिन एक अक्टूबर 2026 को अचानक उक्त जमीन पर फिर से चहारदीवारी का काम पूरा कर लिया गया। इस दौरान जमीन कारोबारियों की मौजूदगी और कुछ मीडिया कर्मियों की सक्रियता भी चर्चा में रही। शहर में इस बात को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि पिछली बार जिस व्यक्ति ने घेराबंदी का विरोध कर काम रुकवाया था, वह इस बार पूरी प्रक्रिया के दौरान शांत क्यों रहा।

इस मामले में रामगढ़ थाना में दिए गए लिखित आवेदन ने विवाद को और गंभीर बना दिया है। आवेदन में शिकायतकर्ता ने जमीन को अपनी पुश्तैनी संपत्ति बताते हुए भू-माफिया और कुछ लोगों पर अवैध कब्जे की कोशिश करने का आरोप लगाया है। आवेदन के अनुसार, संबंधित जमीन रामगढ़ थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या-2, गांधी चौक के पास स्थित है। शिकायतकर्ता ने खाता संख्या 286 तथा प्लॉट संख्या 167, 172 और 173 का उल्लेख करते हुए कुल रकबा 2 एकड़ 23 डिसमिल बताया है। जमीन मौजा रामगढ़, थाना नंबर 82, अंचल रामगढ़ के अंतर्गत बताई गई है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि जमीन से संबंधित कागजात और राजस्व रसीद उसके पास उपलब्ध हैं। आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि वर्ष 2026-27 तक की अद्यतन ऑनलाइन राजस्व रसीद उसके नाम पर निर्गत है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि एक नवंबर 2026 को दिनेश सिंह कुछ अन्य लोगों के साथ जमीन पर पहुंचे और बाउंड्री कराने का प्रयास शुरू कर दिया। विरोध करने पर वहां मौजूद लोगों ने गाली-गलौज की और तीन-चार लोगों से मारपीट कराने की धमकी भी दी।

आवेदन में शिकायतकर्ता ने झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए पुलिस से जमीन पर कथित अवैध कब्जे और घेराबंदी को रोकने की मांग की है। साथ ही जमीन से जुड़े दस्तावेजों और राजस्व रसीद की जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

वहीं, आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि उक्त जमीन पर कब्जे की कोशिश करने वाले लोग भू-माफिया प्रवृत्ति के हैं। शिकायतकर्ता ने पुलिस प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप करने और जमीन पर किसी भी तरह की अवैध गतिविधि रोकने की गुहार लगाई है।

दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा उस व्यक्ति और उसके परिवार की चुप्पी को लेकर हो रही है, जिसने पिछली बार घेराबंदी का विरोध किया था। बताया जाता है कि इस क्षेत्र की अधिकांश जमीन पहले इसी परिवार द्वारा अलग-अलग लोगों को बेची गई थी। परिवार की इस इलाके में काफी जमीन पहले भी थी और अब भी बताई जाती है। ऐसे में पिछली बार विरोध करने वाले पक्ष का इस बार चुप रहना शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी के अनुसार, दोनों पुराने पक्षों के बीच समझौता कराने में जमीन कारोबारियों की भूमिका रही है। चर्चा है कि समझौते के तहत दोनों पक्षों को करोड़ों रुपये दिए गए हैं। यह भी बताया जा रहा है कि उक्त जमीन रांची के किसी बड़े कारोबारी ने खरीदी है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

तीसरे पक्ष के दावे ने बढ़ाई परेशानी

चहारदीवारी पूरी होने के बाद अब तीसरा पक्ष भी सामने आ गया है। इस पक्ष का दावा है कि उक्त जमीन उसके नाम पर है और वर्ष 2026-27 तक की अद्यतन राजस्व रसीद भी उसके पास मौजूद है। इस पक्ष ने न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए जमीन पर अपना अधिकार जताया है।

इधर, पूरे मामले में जमीन के कागजात को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जमीन के दस्तावेजों में कुछ ऐसी गड़बड़ी थी, जिसके कारण पहले से दावा कर रहे दोनों पक्षों ने आनन-फानन में समझौता कर रुपये लेकर चहारदीवारी होने दी।

फिलहाल जमीन की घेराबंदी हो चुकी है, लेकिन मालिकाना हक को लेकर विवाद खत्म होने के बजाय और उलझता दिखाई दे रहा है। एक तरफ पहले से जमीन पर दावा करने वाले पक्षों के बीच कथित समझौते की चर्चा है, तो दूसरी तरफ राजस्व रसीद और न्यायालय के आदेश के आधार पर तीसरे पक्ष ने भी अपना दावा पेश कर दिया है। ऐसे में अब सबकी निगाहें पुलिस प्रशासन और न्यायालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।