रामगढ़ कैंट, झारखंड :प्राचीन दुर्गा मंदिर मंडप में वर्ष 1966 से शुरू हुई कोजागिरी लक्खी पूजा ने इस वर्ष 60 वर्ष पूरे कर लिए। पूजा की षष्ठीपूर्ति के अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मां लक्ष्मी की आराधना की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं पूजा मंडप में उपस्थित रहीं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
पूजा का शुभारंभ संध्या सात बजे प्रधान पुजारी संतोष चक्रवर्ती ने किया। पूजा संपन्न कराने में सहायक के रूप में सुदन सिंह और ऋषिकेश सिंह ने सहयोग दिया। पूजा का समापन रात करीब दस बजे हुआ। इस अवसर पर मां लक्ष्मी को खीर, पूड़ी, केला और नारियल का भोग अर्पित किया गया। पूजा स्थल पर प्राचीन दुर्गा मंदिर पूजा कमेटी के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
कोजागिरी पूर्णिमा का है विशेष धार्मिक महत्व
कोजागिरी पूर्णिमा को लेकर धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कोजागिरी शब्द संस्कृत के ‘को जागृति’ से जुड़ा माना जाता है, जिसका अर्थ है—‘कौन जाग रहा है?’ लोकविश्वास के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों को सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य का आशीर्वाद देती हैं।
इसी मान्यता के कारण अनेक श्रद्धालु अपने घरों में मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं और रात में चांदनी के नीचे खीर रखते हैं। धार्मिक विश्वास है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है। इसी आस्था के साथ श्रद्धालु इस पर्व को मनाते हैं।
प्राचीन दुर्गा मंदिर मंडप में छह दशकों से चली आ रही यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी हुई है। इस वर्ष पूजा के 60 वर्ष पूरे होने पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।