रैली में शामिल बच्चों ने सारुबेरा हनुमान मंदिर एवं शिव मंदिर के आसपास के क्षेत्रों का भ्रमण किया तथा आम लोगों को नशामुक्त जीवन अपनाने का संदेश दिया। विद्यार्थियों ने विभिन्न नारों और संदेशों के माध्यम से समाज को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया।
रैली के बाद विद्यालय परिसर में एक सभा का आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्राचार्य आलोक कुमार ने कहा कि नशा मुक्ति का अर्थ केवल नशीले पदार्थों का सेवन बंद करना नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, स्वतंत्र और सुरक्षित जीवन का पुनर्निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि नशे की लत एक शारीरिक एवं मानसिक बीमारी है, जिससे सही चिकित्सा, दृढ़ इच्छाशक्ति तथा परिवार के सहयोग से पूरी तरह बाहर निकला जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार व समाज को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें।
अभियान के तहत कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के बीच ‘नशा मुक्त भारत’ एवं ‘नशीले पदार्थों का दुष्प्रभाव’ विषय पर निबंध लेखन, पेंटिंग एवं स्लोगन लेखन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से नशे के खिलाफ प्रभावशाली संदेश दिए।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण एवं कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के सभी विद्यार्थी शामिल हुए। आयोजन को सफल बनाने में शिक्षक देवेंद्र पांडेय, बृजेश कुमार सिंह, सकला अंजू बरियार, निलेन्दु कुमार झा, राजीव रंजन सहाय, रवि शंकर शर्मा, रवि शंकर मिश्रा, नवीन कुमार, शशांक कुमार, सुजीत कुमार राय, रश्मि झा, गौतम कुमार, अशोक कुमार तिवारी, मनोज कुमार वर्मा, अक्षय कुमार बारिक एवं भैया आशिष कुमार सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।