इनामी स्पेशल एरिया कमेटी कमांडर अजय महतो उर्फ टाइगर
गिरिडीह (झारखंड) : झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की संयुक्त कार्रवाई में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के 25 लाख रुपये के को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार उसकी गिरफ्तारी नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अजय महतो पर झारखंड के विभिन्न जिलों में हत्या, आईईडी विस्फोट, सुरक्षाबलों पर हमले, लेवी वसूली और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े 240 से अधिक मामले दर्ज हैं।
गुप्त सूचना के आधार पर जंगल में चलाया गया अभियान
गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि 17 जुलाई को खुखरा थाना क्षेत्र के हरलाडीह ओपी अंतर्गत जंगल में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) सुरजीत कुमार और कोबरा-209 बटालियन के कंपनी कमांडर आकिफ अहमद बानी के नेतृत्व में संयुक्त अभियान चलाया गया।
पिपराडीह टोला-खवासटांड़ के जंगल में घेराबंदी के दौरान भागने का प्रयास कर रहे अजय महतो को सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार कर लिया।
दो दशक से अधिक समय से नक्सली गतिविधियों में था सक्रिय
पुलिस के मुताबिक, अजय महतो उर्फ मोछु उर्फ टाइगर समेत कई अन्य नामों से पहचान रखने वाला यह नक्सली गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के नावाडीह गांव का रहने वाला है। वर्ष 2005 से वह माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था। शुरुआत में दस्ता सदस्य के रूप में काम करने के बाद उसे लेवी वसूली, हथियारों के प्रबंधन और संगठन विस्तार की जिम्मेदारियां दी गईं। बाद में उसने झुमरा, लुगु, सारंडा और पारसनाथ क्षेत्रों में संगठन की गतिविधियों का नेतृत्व किया।
कई जिलों में दर्ज हैं 240 से अधिक मामले
पुलिस के अनुसार अजय महतो के खिलाफ झारखंड के कई जिलों में कुल 240 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, बारूदी सुरंग विस्फोट, सुरक्षाबलों पर हमले, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, रंगदारी वसूली और अन्य गंभीर अपराध शामिल हैं। गिरिडीह, पश्चिमी सिंहभूम, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग, चतरा, रामगढ़ और सरायकेला-खरसावां सहित कई जिलों में उसके खिलाफ मामले लंबित हैं।
कई चर्चित नक्सली वारदातों में रहा शामिल
पुलिस जांच के अनुसार अजय महतो पर वर्ष 2008 में पीरटांड़ क्षेत्र में सीआरपीएफ जवानों पर हुए घातक हमले, 2010 में प्रखंड कार्यालय विस्फोट, 2014 में बारूदी सुरंग विस्फोट कर सुरक्षाबलों को निशाना बनाने सहित कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल होने के आरोप हैं। इसके अलावा मुखबिरी के संदेह में ग्रामीणों की हत्या और लेवी नहीं देने वालों पर हिंसक कार्रवाई जैसे मामलों में भी उसका नाम सामने आया है।
गिरफ्तारी से नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका
एसपी डॉ. बिमल कुमार ने कहा कि इस कार्रवाई से माओवादी संगठन के नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि झारखंड पुलिस नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रही है और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही उन्होंने भटके हुए नक्सलियों से राज्य सरकार की “नई दिशा–एक नई पहल” आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर मुख्यधारा में लौटने की अपील की।