रोजगार और परिवहन अधिकार को लेकर विस्थापितों का आंदोलन तेज, आउटसोर्सिंग परियोजना का काम अनिश्चितकाल के लिए बंद

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भुरकुंडा (रामगढ़), झारखंड : रोजगार, परिवहन कार्य में भागीदारी और लंबित विस्थापन संबंधी मांगों को लेकर भुरकुंडा क्षेत्र में रैयत विस्थापितों का आंदोलन बुधवार को उग्र रूप ले लिया। रैयत विस्थापित मोर्चा के बैनर तले बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने आउटसोर्सिंग परियोजना के कार्यस्थल पर प्रदर्शन करते हुए कंपनी का संचालन अनिश्चितकाल के लिए बंद करा दिया। प्रदर्शनकारियों ने ओवरबर्डन (ओबी) परिवहन भी रोक दिया, जिससे परियोजना का उत्पादन प्रभावित हो गया।

मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाया कि परियोजना शुरू होने के बाद से प्रभावित परिवार लगातार रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास की मांग उठा रहे हैं, लेकिन कंपनी प्रबंधन और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होने से विस्थापितों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिला और पुरुष विस्थापित मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित सहमति नहीं बनती, तब तक आउटसोर्सिंग कंपनी का कार्य और परिवहन संचालन बंद रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

विस्थापितों की प्रमुख मांगें

आउटसोर्सिंग कंपनी में 75 प्रतिशत स्थानीय रैयत विस्थापितों को रोजगार दिया जाए।

लोकल सेल का संचालन विस्थापितों के माध्यम से कराया जाए।

कोयला एवं ओबी परिवहन कार्य में स्थानीय विस्थापितों को प्राथमिकता देते हुए ठेका दिया जाए।

विस्थापित परिवारों को लंबित मुआवजा, पुनर्वास एवं अन्य सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराई जाएं।

आंदोलन के कारण परियोजना क्षेत्र में उत्पादन और परिवहन गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित रहीं। फिलहाल कंपनी प्रबंधन या प्रशासन की ओर से आंदोलन को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।