सावन के दूसरे सोमवार को देवघर में आस्था का सैलाब, चार लाख श्रद्धालुओं ने किए बाबा बैद्यनाथ के दर्शन

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देवघर, झारखंड : सावन के दूसरे सोमवार को बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में श्रद्धा और भक्ति का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। शिवभक्तों की भारी भीड़ से पूरा बाबाधाम गेरुआ रंग में रंगा नजर आया। मंदिर परिसर से लेकर शहर की प्रमुख सड़कों तक हर तरफ ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजते रहे।

श्रावणी मेले के इस सोमवार को श्रद्धालुओं की संख्या ने पिछले वर्षों के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया। प्रशासनिक अनुमान के अनुसार करीब चार लाख कांवरियों और श्रद्धालुओं ने बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित किया। वर्ष 2025 के दूसरे सोमवार को लगभग 3.62 लाख तथा 2024 में करीब 2.71 लाख श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया था।

रात से ही कतार में लगने लगे श्रद्धालु

सोमवार को बाबा बैद्यनाथ की पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं का मंदिर की ओर पहुंचने का सिलसिला रविवार रात से ही तेज हो गया था। देर रात के बाद भीड़ लगातार बढ़ती गई। बड़ी संख्या में कांवरिये और श्रद्धालु निर्धारित रूटलाइन के जरिए कतार में आगे बढ़ते रहे।

बताया गया कि मंदिर से कई किलोमीटर दूर तक श्रद्धालुओं की कतार दिखाई दे रही थी। रूटलाइन का विस्तार कुमैठा स्थित टेल प्वाइंट तक पहुंच गया। रास्ते भर शिवभक्त भजन, जयकारे और बाबा बैद्यनाथ के नाम का स्मरण करते हुए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।

भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने भीड़ प्रबंधन के लिए अलग-अलग होल्डिंग प्वाइंट और क्यू सिस्टम को सक्रिय रखा। बीएड कॉलेज परिसर, शिवराम झा चौक, नेहरू पार्क और क्यू कॉम्प्लेक्स समेत विभिन्न स्थानों से श्रद्धालुओं की कतार को नियंत्रित किया गया।

प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने पूरी रात व्यवस्था की निगरानी की, ताकि श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने और जलार्पण में अनावश्यक परेशानी न हो। भीड़ को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

सावन और प्रदोष के संयोग से बढ़ा उत्साह

इस बार दूसरे सोमवार के साथ प्रदोष का भी संयोग रहा। इसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में भक्तों ने बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

बाबाधाम का वातावरण पूरी तरह शिवमय बना रहा। मंदिर परिसर में भक्ति की धारा के साथ शहर की गलियों और कांवरिया मार्गों पर भी श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही।