झारखंड से सुप्रीम कोर्ट तक : जस्टिस अपरेश कुमार सिंह के नाम की कॉलेजियम ने की अनुशंसा

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रांची / दिल्ली  :  झारखंड के देवघर  से जुड़े न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर 2026 को हुई बैठक में तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह के नाम की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए अनुशंसा की हैr

कॉलेजियम ने उनके अलावा गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय के नामों की भी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए अनुशंसा की है। इन अनुशंसाओं पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई होगी।

झारखंड हाईकोर्ट में भी दे चुके हैं सेवाएं

न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह का न्यायिक सफर झारखंड हाईकोर्ट से गहराई से जुड़ा रहा है। तेलंगाना हाईकोर्ट की आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने वर्ष 1990 में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और पटना हाईकोर्ट में वर्ष 1990 से 2000 तक वकालत की। वर्ष 2001 से उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में वकालत शुरू की।

24 जनवरी 2012 को उन्हें झारखंड हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 16 जनवरी 2014 को वे स्थायी न्यायाधीश बने। इसके बाद उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी 20 दिसंबर 2022 से 19 फरवरी 2023 तक जिम्मेदारी संभाली।

त्रिपुरा से तेलंगाना हाईकोर्ट तक का सफर

न्यायमूर्ति सिंह ने 17 अप्रैल 2023 को त्रिपुरा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। इसके बाद उनका स्थानांतरण तेलंगाना हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के पद पर हुआ और उन्होंने 19 जुलाई 2025 को वहां पद की शपथ ली। वर्तमान में वे तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई

न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की है। न्यायिक क्षेत्र में आने से पहले उन्होंने पटना और झारखंड हाईकोर्ट में अधिवक्ता के रूप में काम किया।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ताजा अनुशंसा के बाद अब उनके नाम पर नियुक्ति की निर्धारित प्रक्रिया पूरी की जानी है। इसलिए फिलहाल उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अनुशंसित कहना उचित है, नियुक्त नहीं।