व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर, सफल प्रतिभागियों को दिए जाएंगे प्रमाणपत्र
रामगढ़ कैंट, झारखंड : बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड (BFCL), रामगढ़ में कार्यस्थल पर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित कार्य संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित विशेष सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हुआ। 10 से 16 अक्टूबर 2026 तक चले इस कार्यक्रम में 600 से अधिक श्रमिकों को व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम झारखंड राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त नारायणा इंस्टीट्यूट, चांडिल, जमशेदपुर के सहयोग से आयोजित किया गया। इसमें श्रमिकों को कार्यस्थल पर सुरक्षा नियमों का पालन करने, संभावित खतरों की पहचान करने और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी गई। साथ ही व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) के उचित उपयोग और सुरक्षित कार्यप्रणाली अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान रासायनिक सुरक्षा, मटेरियल सेफ्टी डेटा शीट (एमएसडीएस), आपातकालीन प्रतिक्रिया तथा आपातकालीन निकास द्वार के सुरक्षित उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। श्रमिकों को रसायनों के सुरक्षित रखरखाव, उनसे जुड़े संभावित खतरों और एमएसडीएस में उपलब्ध सुरक्षा संबंधी जानकारियों के बारे में बताया गया। आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई करने और निर्धारित निकास मार्गों का उपयोग कर सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों एवं श्रमिकों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ व्यक्तिगत जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है, ताकि कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके। इस दौरान यह संदेश दिया गया कि सुरक्षा केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक कर्मचारी और श्रमिक की साझा जिम्मेदारी है।
बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए “सेफ्टी फर्स्ट–जीरो हार्म” (सुरक्षा सर्वोपरि–शून्य हानि) के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी की ओर से सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने और मजबूत सुरक्षा संस्कृति विकसित करने के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।