रामगढ़, झारखंड : बृहद झारखंड कला संस्कृति मंच के तत्वावधान में शनिवार, 18 अक्टूबर को आयोजित सोहराय चांचइर आर बरदखूंटा कार्यक्रम ऐतिहासिक रूप से सफल रहा। इसका उद्देश्य झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करना, स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करना और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना था।
यह आयोजन जिला मैदान से प्रारंभ होकर रामगढ़ कॉलेज मैदान तक विशाल शोभायात्रा के रूप में संपन्न हुआ। बताया गया कि इस कार्यक्रम में झारखंड ही नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा से भी हजारों लोग अपने प्रतिनिधि मंडलों के साथ शामिल हुए। अनुमानित रूप से 50,000 से अधिक लोग शहर के जिला मैदान में जुटे और वहां से शोभायात्रा के रूप में चट्टी बाजार, थाना चौक, सुभाष चौक, ब्लॉक चौक होते हुए रामगढ़ कॉलेज मैदान पहुंचे।
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 1000 वालंटियर, कंट्रोल रूम, पानी की व्यवस्था, एम्बुलेंस और मेडिकल टीम की विशेष व्यवस्था की गई थी। दूसरे राज्यों से आने वाले कला प्रेमियों के लिए आवास की व्यवस्था भी की गई थी।
इस विशाल आयोजन में लगभग 2000 ढोल-नगाड़े और 500 चांचइर टीमें शामिल हुईं।
मुख्य आकर्षण
GI टैग प्राप्त सोहराय पेंटिंग का भव्य प्रदर्शन किया गया, जो झारखंड की विशिष्ट कला के रूप में विश्व पहचान बना चुकी है।
लोकगीत, नृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और व्यंजनों की प्रदर्शनी ने दर्शकों को झारखंड की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा।
स्थानीय एवं क्षेत्रीय कलाकारों को मंच प्रदान कर उनकी कला को राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम की सफलता में योगदान देने वाले प्रमुख लोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, विधायक तिवारी महतो, पूर्व विधायक लंबोदर महतो और सुनीता चौधरीओम प्रकाश महतो, द्वारिका प्रसाद, संतोष टिडुआर, नगर परिषद उपाध्यक्ष मनोज कुमार महतो, पूर्व जिप अध्यक्ष ब्रंमदेव महतो, दामोदर महतो, चिंतामणि पटेल, वार्ड पार्षद देवधारी महतो, वार्ड पार्षद रोशन कुमार, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि अरविंद महतो, जागेश्वर नागवंशी, पनेश्वर कुमार, आनंद केटियार, रवि कुमार महतो, देवानंद महतो, संतोष बंसीयार, मुनिनाथ महतो, रमेश कुमार महतो, गिरीशंकर महतो, गुड्डी देवी, रूपा महतो, सीता देवी, निशा देवी, पिंकी देवी, प्रीति देवी, डॉ. राजेश महतो, संतोष चौधरी, महेश निगम, कौलेश्वर महतो, सुधीर अकेला, मुरारी प्रसाद, प्रदीप महतो, पवन महतो, रोहित महतो, धनंजय महतो, पॉवेल कुमार, सुरेन महतो, मुरलीधर कोठारी, अनिल पटेल, मोहित पटेल, पांडव कुमार महतो, सुरेंद्र महतो, मघन महतो, अनुराग महतो, सूरज कुमार, निरंजन महतो, दिपेंदर कुमार, भीमराज महतो, दिनेश महतो, डालचंद ओहदार, जयशंकर महतो, राजेश महतो, उमेश महतो, सुगंध कुमार, किष्टो महतो, पिंटू कुमार, केदार महतो, प्रभु दयाल महतो, अशोक चौधरी, बिनोद कुमार, शिव कुमार, निखिल कुमार महतो, प्रवीण कुमार, अशोक चक्रपानी, रामबिलास महतो, सहित हजारों लोगों की सक्रिय भागीदारी रही।
सोहराय परब केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता, परंपरा और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि यदि स्थानीय परंपराओं को संरक्षण और मंच मिले, तो यह न केवल संस्कृति को जीवित रखेगा बल्कि नई पीढ़ी को अपनी मिट्टी से भी जोड़ेगा।