रांची (झारखंड) :झारखंड हाईकोर्ट की कार्यवाहियों में हिंदी भाषा के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। इस संबंध में हाईकोर्ट की ओर से झारखंड स्टेट बार काउंसिल को पत्र भेजकर न्यायिक कार्यों में हिंदी के इस्तेमाल को लेकर सुझाव मांगे गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार बार काउंसिल से 12 जून तक अपने सुझाव उपलब्ध कराने को कहा गया था। बताया जा रहा है कि यह पहल न्यायिक प्रक्रिया को आम लोगों के लिए अधिक सरल, सुलभ और समझने योग्य बनाने के उद्देश्य से की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस विषय पर झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से राय मांगी है। इसके बाद हाईकोर्ट ने विभिन्न पक्षों से सुझाव लेने की प्रक्रिया शुरू की है।
वर्तमान में झारखंड हाईकोर्ट की अधिकांश कानूनी कार्यवाहियां और दस्तावेज अंग्रेजी भाषा में संचालित होते हैं। ऐसे में हिंदी को न्यायिक प्रक्रिया में शामिल करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।
उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे की शुरुआत झारखंड के तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस द्वारा राष्ट्रपति को लिखे गए एक पत्र से हुई थी। इसके बाद इस विषय पर विभिन्न स्तरों पर चर्चा शुरू हुई और अब इसे लेकर औपचारिक सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं।
यदि इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो झारखंड में न्यायिक कार्यवाहियों को आम नागरिकों के लिए अधिक सुगम बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।