‘प्रकृति की सहचरी : डॉ शारदा प्रसाद’ पर आयोजित हुई साहित्यिक परिचर्चा, प्रकृति और मानवीय मूल्यों पर हुआ मंथन

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रामगढ महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्या हैं डॉ शारदा प्रसाद

मॉरीशस : मॉरीशस के सेंट पियरे स्थित शिव शक्ति मंदिर, ला लॉरा में प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. सोमदत्त काशीनाथ की पुस्तक ‘प्रकृति की सहचरी : डॉ. शारदा प्रसाद’ पर एक विशेष साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा, समाज और संस्कृति से जुड़े अनेक विद्वानों एवं साहित्यप्रेमियों ने भाग लेकर पुस्तक के विविध आयामों पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. शारदा प्रसाद, डॉ. लालदेव अंचराज, श्रीमती सविता तिवारी, श्री मोहनलाल जगेसर तथा श्री बसंत कुमार हेतमरसिया सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। परिचर्चा का संचालन हिंदी साहित्य और भाषा सेवा के क्षेत्र में सक्रिय श्रीमती सविता तिवारी ने किया।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि यह पुस्तक प्रकृति के सौंदर्य के वर्णन तक सीमित नहीं है, बल्कि मनुष्य, पर्यावरण और जीवन मूल्यों के बीच गहरे संबंधों को भी उजागर करती है। पुस्तक में प्रकृति को जीवन की प्रेरक शक्ति और आध्यात्मिक चेतना के स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

चर्चा के दौरान पुस्तक की भाषा, प्रस्तुति शैली, संवेदनात्मक अभिव्यक्ति तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आज के तेजी से बदलते समय में, जब मनुष्य प्रकृति से दूर होता जा रहा है, ऐसी कृतियां समाज को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों ने भी पुस्तक के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। कई वक्ताओं ने इसे चिंतनशील, प्रेरक और साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रचना बताते हुए कहा कि पुस्तक पाठकों को आत्ममंथन के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक करती है।

अपने संबोधन में पुस्तक के लेखक डॉ. सोमदत्त काशीनाथ ने पुस्तक के सृजन की पृष्ठभूमि, प्रेरणा और लेखन यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का एक सशक्त साधन भी है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. शारदा प्रसाद ने पुस्तक के लेखन के लिए डॉ. सोमदत्त काशीनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए श्रीमती सविता तिवारी तथा उपस्थित सभी अतिथियों और सहभागियों को धन्यवाद दिया।

साहित्य, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं के समन्वय को समर्पित यह परिचर्चा प्रतिभागियों के लिए एक प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक अनुभव साबित हुई।