रामगढ़ (झारखंड) : विकासनगर स्थित श्री कृष्ण विद्या मंदिर में मंगलवार को गौरवशाली जनजातीय क्रांति के प्रतीक हूल दिवस का आयोजन श्रद्धा एवं गरिमापूर्ण वातावरण में किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने 1855 की हूल क्रांति के महानायक सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, वीरांगना फूलो-झानो सहित देश की माटी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले सभी वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ कक्षाओं के विद्यार्थियों ने हूल क्रांति के ऐतिहासिक घटनाक्रम पर आधारित प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत किए, जिसने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।
विद्यालय की प्राचार्या गुरप्रीत कौर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि 30 जून 1855 को शुरू हुई हूल क्रांति केवल जल, जंगल और जमीन की रक्षा का आंदोलन नहीं थी, बल्कि ब्रिटिश हुकूमत के दमन के विरुद्ध देश की पहली संगठित जनक्रांति थी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को सिदो-कान्हू जैसे महान नायकों के शौर्य, त्याग और स्वाभिमान से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देना चाहिए।
विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष आनंद अग्रवाल (अधिवक्ता) ने संथाल हूल के महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह दिवस हमें याद दिलाता है कि एकजुटता और संगठित प्रतिरोध के बल पर शोषण, अत्याचार और अन्याय को परास्त किया जा सकता है तथा संघर्ष के माध्यम से ही सत्य और न्याय का मार्ग प्रशस्त होता है।
कार्यक्रम में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं, गैर-शिक्षण कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।