नई उत्पाद नीति, अवैध शराब पर कार्रवाई और प्रीमियम ब्रांड की बढ़ती मांग से पहली तिमाही में रिकॉर्ड आय, वार्षिक लक्ष्य पार होने के संकेत
रांची (झारखंड) : झारखंड में वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शराब की बिक्री से सरकार की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल से जून 2026 के बीच राज्य के उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने 1,272 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जो निर्धारित 1,169 करोड़ रुपये के लक्ष्य से 103 करोड़ रुपये अधिक है। पहली तिमाही के नतीजे बताते हैं कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो सरकार इस वर्ष तय किए गए 4,600 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य को भी पार कर सकती है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, तीनों महीनों में राजस्व संग्रह लगभग समान स्तर पर रहा। अप्रैल में करीब 424.38 करोड़ रुपये, मई में लगभग 425 करोड़ रुपये और जून में करीब 423 करोड़ रुपये की आय दर्ज की गई। लगातार तीन महीने 400 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होना उत्पाद विभाग के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार को शराब की बिक्री से लगभग 4,010 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था, जबकि लक्ष्य 3,885 करोड़ रुपये रखा गया था। उससे पहले वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा करीब 2,710 करोड़ रुपये था। यानी महज एक वर्ष में शराब से होने वाली सरकारी आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
यदि दो दशक पहले के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2001-02 में राज्य को शराब से केवल 101.98 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इसके बाद आय में लगातार बढ़ोतरी होती रही। वर्ष 2018-19 में पहली बार राजस्व 1,000 करोड़ रुपये के पार पहुंचा, जबकि 2019-20 में यह आंकड़ा 2,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। अब वर्ष 2025-26 में पहली बार यह आय 4,000 करोड़ रुपये का स्तर पार कर चुकी है।
पिछले वर्षों का राजस्व
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2020-21: ₹1,821.18 करोड़
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2021-22: ₹1,806.60 करोड़
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2022-23: ₹2,056.92 करोड़
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2023-24: ₹2,376.10 करोड़
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2024-25: ₹2,710.53 करोड़
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2025-26: ₹4,010 करोड़
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2026-27: ₹4,600 करोड़ (लक्ष्य)
राजस्व बढ़ने के प्रमुख कारण
उत्पाद विभाग के अनुसार, राजस्व में बढ़ोतरी के पीछे कई अहम कारण हैं। राज्य सरकार की नई उत्पाद नीति के तहत शराब बिक्री व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया गया है, जिससे कर संग्रह में सुधार हुआ है।
इसके अलावा अवैध शराब के निर्माण, तस्करी और बिक्री के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे अभियान से गैरकानूनी कारोबार पर अंकुश लगा है। इसका लाभ वैध शराब की बिक्री और सरकारी राजस्व दोनों को मिला है।
वहीं, शहरी क्षेत्रों में प्रीमियम और महंगे ब्रांड की शराब की मांग बढ़ने से भी सरकार की आय में इजाफा हुआ है, क्योंकि इन उत्पादों पर कर की दर अपेक्षाकृत अधिक होती है। विभाग का मानना है कि मौजूदा रुझान जारी रहा तो चालू वित्तीय वर्ष में भी राजस्व का नया रिकॉर्ड बन सकता है।