इंटक के प्रतिनिधित्व पर फिर लगी रोक, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई अंतरिम पाबंदी

Spread the love

नई दिल्ली / रांची : इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के संगठनात्मक विवाद को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से एक बार फिर स्थिति बदल गई है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के 23 अप्रैल 2026 को दिए गए फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसके साथ ही केंद्रीय श्रम मंत्रालय की बैठकों तथा विभिन्न द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय समितियों में इंटक के प्रतिनिधित्व का मामला फिर अटक गया है।

मामला इंटक के आंतरिक विवाद और उसके प्रतिनिधित्व से जुड़ा हुआ है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के 4 जनवरी 2017 के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत इंटक के संगठनात्मक विवाद के न्यायिक रूप से लंबित रहने तक मंत्रालय की बैठकों और द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय समितियों में संगठन को प्रतिनिधित्व नहीं देने की व्यवस्था की गई थी।

हाईकोर्ट के इस फैसले को केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। मंत्रालय की ओर से विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल किए जाने के बाद मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की पीठ ने की।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में इंटक को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट के 23 अप्रैल 2026 के आदेश के प्रभाव पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

लंबे समय से न्यायिक विवाद में इंटक का नेतृत्व

इंटक के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद लंबे समय से अदालतों में विचाराधीन है। इस विवाद का असर केंद्रीय स्तर पर संगठन के प्रतिनिधित्व पर भी पड़ा है। श्रम मंत्रालय से संबंधित बैठकों और विभिन्न समितियों में इंटक की भागीदारी को लेकर समय-समय पर कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत पड़ती रही है।

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब इस मामले में अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल इंटक के प्रतिनिधित्व को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश से बनी स्थिति पर रोक है और मामले की अंतिम दिशा सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।