पान मसाला पैकिंग में प्लास्टिक सेशे पर प्रस्तावित प्रतिबंध का सुरेश पी अग्रवाल ने किया स्वागत

Spread the love

रामगढ़ कैंट, झारखंड : रोटरी जिला 3250 की “प्लास्टिक को ना कहें” जिला समिति के सह-चेयरमैन सुरेश पी. अग्रवाल ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा पान मसाला एवं तंबाकू उत्पादों की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक सेशे पर प्रस्तावित प्रतिबंध के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

सुरेश पी. अग्रवाल ने कहा कि पान मसाला, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले मल्टी-लेयर प्लास्टिक सेशे पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं। ये प्लास्टिक सेशे आसानी से रिसाइकिल नहीं हो पाते और लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं। इनके कारण नालियों, नदियों और मिट्टी में प्लास्टिक कचरा जमा होकर प्रदूषण बढ़ता है।

उन्होंने बताया कि एक अनुमान के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष करीब 40 हजार टन पान मसाला पैकेजिंग से जुड़ा प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है। इस तरह का कचरा लंबे समय तक पर्यावरण में बना रहता है और इसके निस्तारण की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।

उन्होंने कहा कि प्लास्टिक सेशे पर प्रस्तावित प्रतिबंध सिर्फ पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि जनस्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। प्लास्टिक के सूक्ष्म कणों के खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करने को लेकर वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में प्लास्टिक कचरे को कम करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है।

सुरेश पी. अग्रवाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार, उद्योग जगत और आम लोगों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने लोगों से सिंगल यूज प्लास्टिक से बचने और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को अपनाने की अपील की।