पटना / भागलपुर ( बिहार ) : देशभर में अपने अनोखे चुनावी सफर के लिए चर्चित भागलपुर के समाजसेवी नागरमल बाजोरिया का गुरुवार सुबह पटना में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 97 वर्ष के थे। चुनावी राजनीति में लगातार सक्रिय रहने और बार-बार चुनाव मैदान में उतरने के कारण उन्हें ‘धरती पकड़’ के नाम से जाना जाता था। उनके निधन की खबर से भागलपुर के सामाजिक और व्यवसायिक क्षेत्र में शोक की लहर है।
नागरमल बाजोरिया का चुनावी सफर बेहद असाधारण रहा। उन्होंने स्थानीय निकाय और ग्राम पंचायत स्तर से लेकर विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा तक चुनाव लड़ा। इसके अलावा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में भी उन्होंने कई बार अपनी दावेदारी पेश की। उनके चुनाव लड़ने की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आते रहे हैं, लेकिन उनके करीबी लोगों और सामाजिक संगठनों के अनुसार उन्होंने करीब 284 चुनावों में भाग लिया था।
राष्ट्रपति चुनाव में भी आजमाई किस्मत
नागरमल बाजोरिया का राजनीतिक सफर किसी एक क्षेत्र या चुनाव तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने देश के शीर्ष संवैधानिक पद के लिए भी चुनावी मैदान में उतरने का प्रयास किया। वर्ष 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने प्रणब मुखर्जी के खिलाफ नामांकन दाखिल किया था।
इससे पहले वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली और राजीव गांधी के खिलाफ अमेठी से भी चुनाव लड़ चुके थे। उनके चुनावी अभियान का अंदाज भी पारंपरिक नेताओं से बिल्कुल अलग रहता था।
30 साल की उम्र में नगरपालिका चुनाव जीतने का दावा
नागरमल बाजोरिया को आम तौर पर ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने सैकड़ों चुनाव लड़े लेकिन सफलता नहीं मिली। हालांकि, उनके चुनावी जीवन का एक अलग पहलू भी सामने आता है। वर्ष 2015 में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने दावा किया था कि करीब 30 वर्ष की उम्र में उन्होंने भागलपुर नगरपालिका का चुनाव जीता था।
बताया जाता है कि चुनाव जीतने के बाद उन्होंने पार्षद का पद छोड़ दिया था। इसलिए उनके पूरे राजनीतिक जीवन को केवल ‘कभी चुनाव नहीं जीतने वाले उम्मीदवार’ के तौर पर देखना पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता।
गधों और तांगे के साथ करते थे प्रचार
बाजोरिया का चुनाव प्रचार भी उन्हें दूसरे प्रत्याशियों से अलग पहचान दिलाता था। वह कई बार प्रचार के दौरान गधों को साथ लेकर निकलते थे और तांगे पर सवार होकर लोगों के बीच पहुंचते थे। उनका यह अनोखा अंदाज चुनावी मौसम में लोगों के आकर्षण का केंद्र बन जाता था और वह स्थानीय स्तर पर खूब चर्चा में रहते थे।
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी उनका नाम चर्चा में रहा था। सैंडिस कंपाउंड में एनडीए प्रत्याशी और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के समर्थन में आयोजित सभा में उन्होंने अपने समर्थकों के साथ एनडीए का समर्थन किया था। इसके बाद वह फिर स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतर गए।
पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था जन्म
ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पदाधिकारी रमण साह के अनुसार, नागरमल बाजोरिया का जन्म तत्कालीन अविभाजित भारत के लाहौर में हुआ था। देश के विभाजन और आजादी से पहले ही उनका परिवार भागलपुर आकर बस गया था। इसके बाद भागलपुर ही उनकी कर्मभूमि बन गया और उन्होंने लंबे समय तक शहर के सामाजिक व व्यावसायिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई।
चेंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष रामगोपाल पोद्दार ने भी उनके लंबे चुनावी सफर को याद करते हुए कहा कि करीब 284 चुनाव लड़ना अपने आप में एक अलग तरह का रिकॉर्ड है। उनके अनुसार बाजोरिया ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में कुल 17 बार हिस्सा लिया था।
गरीब परिवारों की मदद में भी रहे आगे
नागरमल बाजोरिया की पहचान सिर्फ चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी के तौर पर नहीं थी। वह सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते थे। सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों के मुताबिक उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद, गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग, जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में सहायता और ग्रामीण क्षेत्रों में चापाकल लगवाने जैसे कार्यों में योगदान दिया।
इसके अलावा वह गौवध के विरोध में भी अभियान चलाते रहे। भागलपुर के लोगों के साथ उनका जुड़ाव लंबे समय तक बना रहा और सामाजिक गतिविधियों में उनकी मौजूदगी लगातार देखी जाती रही।
सामाजिक संगठनों ने जताया दुख
नागरमल बाजोरिया के निधन पर मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष अनिल खेतान, ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष शरद सलारपुरिया, पूर्व अध्यक्ष श्रवण बाजोरिया, चांद झुनझुनवाला समेत कई सामाजिक एवं व्यवसायिक संगठनों से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त किया।
चांद झुनझुनवाला के अनुसार, नागरमल बाजोरिया का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए भागलपुर लाया जा रहा है। पटना से पार्थिव शरीर के शाम तक भागलपुर पहुंचने की संभावना है, जहां शहरवासी उन्हें अंतिम विदाई दे सकेंगे।