रामगढ़, झारखंड : रामगढ़ जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने नाबालिग पीड़िता से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त गौरांग राय उर्फ गौरंग राय को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही पीड़िता को प्रतिकर के रूप में 2 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया है।
16 वर्ष से अधिक समय बाद आया फैसला
अदालत के फैसले के अनुसार, यह मामला सत्र वाद संख्या 100/2010 से संबंधित है। मामले की प्राथमिकी रामगढ़ थाना कांड संख्या 339/2009 के तहत दर्ज की गई थी, जिसका संबंधित जीआर मामला संख्या 4366/2009 है।
अदालती अभिलेख के अनुसार, घटना 10 नवंबर 2009 की है, जबकि प्राथमिकी 11 नवंबर 2009 को दर्ज की गई थी। चार्जशीट 09 जनवरी 2010 , आरोप 09 अगस्त 2010 को तथा मामले में 9 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया गया। अभिलेख में मामले की अवधि 16 वर्ष 6 महीने 18 दिन दर्ज है।
धारा 376-2(जी) और 386 के तहत दोषसिद्धि
अदालत ने भारतीय दंड विधान की धारा 376-2(जी) तथा 386 के तहत अभियुक्त गौरांग राय को दोषी ठहराया। फैसले में उसे आजीवन कारावास के साथ जुर्माना और पीड़िता को प्रतिकर देने का आदेश दर्ज है।
अदालती दस्तावेज के अनुसार, अभियुक्त गौरांग राय की उम्र लगभग 72 वर्ष दर्ज की गई है। वह रामगढ़ थाना क्षेत्र के सौदागर मोहल्ला निवासी हरेंद्र राय का पुत्र बताया गया है।
पटना से रांची जा रही थी पीड़िता
मामले के सारांश के अनुसार, नाबालिग पीड़िता अपने पिता के साथ पटना से रांची जाने वाली बस से यात्रा कर रही थी। चुनाव के कारण बस को रामगढ़ में रोक दिया गया, जिसके बाद पीड़िता और उसके पिता को एक होटल मेन रोड सुभाष चौक के निकट लाजवंती मार्केट के उपर होटल व्यू एंड विजन में रुकना पड़ा।
आरोप के अनुसार, होटल संचालक गौरांग राय और उसके अन्य साथियों ने पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। पीड़िता के आवेदन पर न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई और साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को दोषी ठहराया गया।
डालसा को फैसले की प्रति उपलब्ध कराई गई
फैसले की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) को उपलब्ध कराई गई है। दस्तावेज में झारखंड पीड़ित प्रतिकर अधिनियम के तहत पीड़िता को उचित मुआवजा दिलाने के लिए डालसा सचिव अनिल कुमार को आदेश दिए जाने का उल्लेख है।
अदालत के फैसले में दोषी को आजीवन कारावास, 50,000 रुपये का अर्थदंड और पीड़िता को 2,00,000 रुपये प्रतिकर देने का निर्देश शामिल है।