338 तारीखों में हुई सुनवाई के बाद 260 पन्नों में फैसला, संदेह का लाभ देते हुए दोनों को मिली रिहाई
धनबाद, झारखंड : चर्चित रंजय सिंह हत्याकांड में करीब नौ वर्षों तक चली लंबी न्यायिक सुनवाई के बाद धनबाद की अदालत ने शनिवार को अपना फैसला सुनाया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने मामले के आरोपी संजय सिंह के पुत्र हर्ष सिंह एवं नंद कुमार सिंह उर्फ मामा को रंजय सिंह की हत्या तथा राजा यादव पर जानलेवा हमला करने के आरोपों से संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
फैसला सुनाए जाने के दौरान हर्ष सिंह अदालत में उपस्थित थे, जबकि नंद कुमार सिंह उर्फ मामा को रांची स्थित होटवार जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता समर श्रीवास्तव, आयुष श्रीवास्तव और सिद्धार्थ शर्मा ने पैरवी की।
अदालत ने यह फैसला 338 तारीखों में हुई सुनवाई के बाद सुनाया। फैसला 260 पन्नों में लिखा गया है। मामले में कुल 24 गवाहों ने अपनी गवाही दर्ज कराई थी।
बिग बाजार के समीप गोली मारकर की गई थी रंजय की हत्या
रंजय सिंह उर्फ राजीव रंजन सिंह की हत्या 29 जनवरी 2017 को शाम करीब 5:30 बजे धनबाद के बिग बाजार के सामने चाणक्य नगर मोड़ पर रामेश्वर तिवारी के घर के समीप गोली मारकर कर दी गई थी। घटना के समय रंजय के साथ स्कूटी पर सवार राजा यादव गोलीबारी में बाल-बाल बच गए थे।
जानकारी के अनुसार, रंजय सिंह चाणक्य नगर स्थित अपने फ्लैट से दूध का बर्तन लेकर सिंह मेंशन की ओर जा रहे थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बाइक सवार दो हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गंभीर रूप से घायल रंजय को आनन-फानन में सेंट्रल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
चश्मदीद राजा यादव के बयान पर 30 जनवरी 2017 को अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस जांच एवं राजा यादव द्वारा तैयार कराए गए स्केच के आधार पर शूटरों की पहचान किए जाने की बात सामने आई थी।
नंद कुमार सिंह 2018 से होटवार जेल में बंद
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, नंद कुमार सिंह उर्फ मामा 8 अगस्त 2018 से रांची के होटवार जेल में बंद है। सरायढेला थाना प्रभारी निरंजन तिवारी ने 5 नवंबर 2018 को नंद कुमार सिंह उर्फ मामा को शूटर बताते हुए उसके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।
वहीं, हर्ष सिंह के खिलाफ 23 फरवरी 2019 को आरोप पत्र दाखिल किया गया। चंदन शर्मा और हरेंद्र सिंह के खिलाफ अनुसंधान जारी रखा गया था। बाद में 11 दिसंबर 2025 को पुलिस ने चंदन शर्मा को फरार बताते हुए उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। चंदन शर्मा फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर है और उसके खिलाफ उसकी अनुपस्थिति में सुनवाई चल रही है।
2019 में गठित हुए थे आरोप
अदालत ने हर्ष सिंह के खिलाफ 11 नवंबर 2019 को तथा नंद कुमार सिंह उर्फ मामा के खिलाफ 16 नवंबर 2019 को आरोप गठित कर विचारण की प्रक्रिया शुरू की थी। लंबी सुनवाई के बाद शनिवार को अदालत ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।