चुट्टूपालू घाटी में फिर मचा दुर्घटना का तांडव, ब्रेक फेल कंटेनर ने दर्जनों वाहनों को मारी टक्कर ; कई घायल

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कंटेनर ट्रक

रामगढ़ कैंट (झारखंड) : रामगढ़-रांची मार्ग पर स्थित चुट्टूपालू घाटी में शुक्रवार, 6 नवंबर को एक बार फिर भीषण सड़क हादसा हुआ। ब्रेक फेल होने के बाद अनियंत्रित कंटेनर ट्रक ने घाटी में आगे चल रहे कई वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में दर्जनों लोगों के घायल होने की सूचना है। इनमें से दो घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल रामगढ़ लाया गया, जबकि अन्य घायलों का उपचार दूसरे अस्पतालों में कराया गया। राहत की बात यह रही कि इस दुर्घटना में किसी की मौत की सूचना नहीं है।

ब्रेक फेल कंटेनर ट्रक की चपेट में आये कार

मिली जानकारी के अनुसार, कंटेनर ट्रक (एनएल01एसीओ3332) का घाटी में अचानक ब्रेक फेल हो गया। इसके बाद चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और ट्रक ने रास्ते में आने वाले कई वाहनों को टक्कर मार दी। इसकी चपेट में एक स्कूटी और मोटरसाइकिल भी आ गई। अनियंत्रित कंटेनर सैनी होटल के सामने डिवाइडर पार कर सड़क की दूसरी तरफ पहुंच गया और वहां खड़ी तीन से चार कारों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।

पुलिस और एंबुलेंस ने संभाला मोर्चा

हादसे की सूचना मिलते ही रामगढ़ थाना की पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। वहीं, दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाकर किनारे किया गया, ताकि यातायात व्यवस्था को सामान्य बनाया जा सके। कई घंटे तक सड़क जाम रहा।

करोड़ों की योजनाओं के बावजूद नहीं थम रहे हादसे

चुट्टूपालू घाटी में लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों से इस घाटी को दुर्घटनामुक्त बनाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा है।

हाल ही में चुट्टूपालू और चरही घाटी को दुर्घटनामुक्त बनाने के लिए 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इस परियोजना का काम कब शुरू होगा, इसे लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। स्थानीय लोगों के मन में भी यही सवाल है कि आखिर इस योजना का लाभ सड़क इस्तेमाल करने वालों को कब मिलेगा।

घाटी की बनावट में सुधार को बताया जरूरी

सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, केवल चेतावनी बोर्ड लगाने और वाहनों की गति नियंत्रित करने से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। घाटी की सड़क के एकतरफा ढलान और बनावट में तकनीकी सुधार करना भी जरूरी है। उनका मानना है कि जब तक सड़क की संरचनात्मक खामियों को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक यहां दुर्घटनाओं का खतरा बना रहेगा।

चुट्टूपालू घाटी में बार-बार होने वाले हादसे अब गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं। जरूरत इस बात की है कि स्वीकृत योजनाओं को कागजों से निकालकर धरातल पर उतारा जाए, ताकि इस खतरनाक मार्ग पर सफर करने वाले लोगों की जान सुरक्षित रह सके।