रामगढ़, झारखंड :रांची रोड मरार, रामगढ़ स्थित स्कॉलर्स हाई विद्यालय के लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि विद्यालय की संस्थापिका एवं निर्देशिका श्रीमती गीतांजलि जाजू ने आईआईटी दिल्ली द्वारा आयोजित 16वें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में सहभागिता की। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में देश-विदेश से शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया।
सम्मेलन के दौरान श्रीमती जाजू ने झारखंड और बिहार जैसे टीयर-3 श्रेणी के शहरों में स्थित विद्यालयों की वर्तमान शिक्षण पद्धतियों और उनसे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षण प्रणाली में कई बार शिक्षक नए अवसरों, तकनीकों और पद्धतियों को अपनाने में संकोच करते हैं। विषय-वस्तु की गहराई, अनुभव और प्रशिक्षण की कमी के कारण शिक्षण प्रक्रिया में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं, जो शैक्षणिक संस्थानों के लिए बड़ी चुनौती है। कई बार शिक्षकों को आवश्यक संसाधन और अवसर भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पाते।
उन्होंने कहा कि आज के छात्रों और अभिभावकों को शिक्षा से निरंतर जोड़े रखने के लिए आधुनिक शिक्षण प्रणाली को अपनाना समय की आवश्यकता है। विद्यार्थियों के अध्ययन को सरल, रुचिकर और प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों को लगातार नए तथ्यों, आयामों और प्रयोगों के लिए तैयार रहना होगा। केवल पारंपरिक शिक्षा प्रणाली पर निर्भर रहना भविष्य के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
अपने संबोधन में उन्होंने जोर देकर कहा कि एक सशक्त टीम—जिसमें शिक्षक, छात्र और अभिभावक शामिल हों—शिक्षण व्यवस्था के सभी आयामों को मजबूत बना सकती है। जब तक शिक्षा जगत परिवर्तनशील प्रकृति को स्वीकार नहीं करेगा, तब तक 21वीं सदी में भारत को विकसित देशों की अग्रिम पंक्ति में लाना कठिन होगा। इसलिए शिक्षक की सोच, दृष्टिकोण और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन जरूरी है, क्योंकि वही छात्रों और शिक्षण प्रक्रिया को दिशा देते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से युवा वर्ग के लिए और अधिक अनुकूल सीखने का वातावरण तैयार किया जा सकता है। इससे शिक्षा क्षेत्र में बड़े और सकारात्मक बदलाव संभव हैं। उन्होंने कहा कि भागीदारी से हम आने वाले समय के लिए अधिक तैयार होंगे। प्रायोगिक शिक्षा की परंपरा, जो 20 वर्ष पहले शुरू हुई थी, आज प्रशिक्षित शिक्षकों के साथ विभिन्न विद्यालयों में सफलतापूर्वक लागू हो रही है। जहां भी हमारे शिक्षक जुड़ते हैं, वहां परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी इसी विजन के अनुरूप प्लान किए जाते हैं। एक ड्रीम टीम बनानी होगी, जिसमें ज्ञान से ज्यादा कौशल और उससे भी अधिक व्यवहार व दृष्टिकोण की अहम भूमिका होगी।
सम्मेलन में श्रीमती गीतांजलि जाजू की भागीदारी ने न केवल स्कॉलर्स हाई विद्यालय, बल्कि रामगढ़ एवं पूरे झारखंड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है।