कार्यक्रम की शुरुआत भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों द्वारा श्रद्धा सुमन अर्पित कर की गई। इसके बाद सभी विद्यार्थियों ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उनके संघर्ष, शिक्षा के प्रति समर्पण और सामाजिक न्याय के लिए किए गए योगदान को याद किया गया।
कार्यक्रम का संचालन समाज विज्ञान की वरिष्ठ शिक्षिका उषा सिंह ने प्रभावशाली ढंग से किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अंबेडकर जयंती के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि यह दिन समानता, न्याय और आत्मसम्मान के मूल्यों को अपनाने का संदेश देता है। साथ ही उन्होंने बैसाखी के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला।
कक्षा 12वीं के छात्र युवराज और शैली ने भी भीम जयंती और बैसाखी पर ओजस्वी भाषण प्रस्तुत कर सभी को प्रेरित किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक और गिद्धा नृत्य रहा।
नुक्कड़ नाटक में डॉक्टर अंबेडकर के सामाजिक आंदोलन से पहले समाज में व्याप्त छुआछूत, जातिगत भेदभाव और असमानता को मार्मिक ढंग से दर्शाया गया, साथ ही यह भी बताया गया कि उनके प्रयासों से समाज में कैसे जागरूकता और परिवर्तन आया। यह प्रस्तुति दर्शकों को गहराई से प्रभावित करने में सफल रही।
वहीं गिद्धा नृत्य ने पूरे परिसर को उत्साह और सांस्कृतिक रंगों से भर दिया। पारंपरिक वेशभूषा और संगीत के साथ प्रस्तुत इस नृत्य ने पंजाब की लोक संस्कृति की झलक पेश की और भारत की विविधता में एकता का संदेश दिया।
यह आयोजन केवल पर्व मनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों को महान व्यक्तित्वों के आदर्शों, भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं और सामाजिक समरसता के मूल्यों से जोड़ने का सार्थक प्रयास भी रहा। विद्यालय में आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों के मन-मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ते हैं और उन्हें जीवन में सत्य, समानता, परिश्रम और संस्कृति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।