मदर्स डे पर रामगढ़ जिला अभिभावक संघ ने माताओं को किया सम्मानित, रविशंकर राय ने माता-पिता के सम्मान का दिया संदेश

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रामगढ़ कैंट  (झारखंड) : मातृ दिवस (मदर्स डे) के अवसर पर रामगढ़ जिला अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष रविशंकर राय ने जिले की कई माताओं को सम्मानित किया और कहा कि मां के लिए केवल एक दिन नहीं, बल्कि वर्ष का हर दिन समर्पित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में मां को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और हमारे देश में जन्मदात्री मां के साथ-साथ भारत माता, धरती माता, गंगा माई और प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों को भी मां का दर्जा दिया जाता है।

रविशंकर राय ने कहा कि भारत की परंपरा हमें सिखाती है कि मातृत्व केवल जन्म देने तक सीमित नहीं है, बल्कि त्याग, समर्पण, करुणा और संरक्षण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हम स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उस देश में जन्मे हैं जहां मातृत्व को पूजा जाता है और राष्ट्र को भी माता के रूप में संबोधित किया जाता है।

उन्होंने कहा कि जिस धरती पर हम रहते हैं उसे धरती माता कहा जाता है, नदियों को मां के रूप में सम्मान दिया जाता है और प्रकृति के संसाधनों को भी जीवनदायिनी मानकर आदर दिया जाता है। ऐसे में हमारा दायित्व बनता है कि हम प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करें और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

रविशंकर राय ने कहा कि पौराणिक कथाओं में भी माता के ऋण को असीम बताया गया है। उन्होंने कहा कि जन्म देने वाली मां का स्थान कोई नहीं ले सकता। मां के त्याग, स्नेह और सेवा का प्रतिदान देना संभव नहीं है, लेकिन उनके प्रति सम्मान, सेवा और आज्ञापालन के माध्यम से हम अपने कर्तव्य का निर्वहन कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि केवल मदर्स डे पर मां के साथ सेल्फी लेना या सोशल मीडिया पर संदेश साझा करना पर्याप्त नहीं है। इस दिवस की वास्तविक सार्थकता तब सिद्ध होगी जब बच्चे अपने माता-पिता की भावनाओं को समझें, उनका सम्मान करें और उनके बताए मार्ग पर चलें।

उन्होंने कहा कि वृद्ध माता-पिता की सेवा उसी समर्पण और प्रेम से करनी चाहिए, जिस निस्वार्थ भाव से उन्होंने बचपन में हमारी देखभाल की। यही सच्चे अर्थों में मातृ दिवस मनाने का संदेश है।

मदर्स डे के अवसर पर रविशंकर राय ने सभी माताओं को नमन करते हुए बच्चों से अपील की कि वे अपने माता-पिता की बातों का सम्मान करें, उनका कहना मानें और जीवनभर उनके प्रति कृतज्ञ बने रहें। उन्होंने कहा कि यही मातृ दिवस मनाने की सबसे बड़ी सार्थकता है।