रामगढ़ (झारखंड) : शांतिधारा फाउंडेशन ने देश में तेजी से बढ़ रहे कैंसर के मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्यसभा की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रो. राम गोपाल यादव को ईमेल और पत्र भेजकर कैंसर की रोकथाम एवं उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए चार महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
फाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष सुरेश पी. अग्रवाल ने अपने पत्र में कहा कि वर्ष 2026 में भारत में कैंसर के नए मरीजों की संख्या 20 लाख तक पहुंचने की आशंका है, जबकि प्रतिवर्ष करीब 8 लाख लोगों की मौत कैंसर के कारण हो रही है। उन्होंने कहा कि समिति द्वारा चिकित्सा विशेषज्ञों और आम नागरिकों से सुझाव आमंत्रित करना एक सराहनीय पहल है।
उन्होंने कहा, “कैंसर में रोकथाम ही सबसे प्रभावी इलाज है। यदि बीमारी का पता प्रारंभिक चरण में चल जाए तो मरीज के बचने की संभावना 80 प्रतिशत से अधिक होती है और उपचार का खर्च भी पांच से छह गुना तक कम हो जाता है।”
फाउंडेशन के चार प्रमुख सुझाव
1. निःशुल्क प्रारंभिक जांच की व्यवस्था सभी जिला सदर अस्पतालों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मैमोग्राफी, पैप स्मीयर, एचपीवी और पीएसए जैसी आवश्यक कैंसर जांचें निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएं।
2. 40 वर्ष से अधिक आयु वालों की वार्षिक स्क्रीनिंग 40 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों के लिए हर वर्ष निःशुल्क और अनिवार्य कैंसर स्क्रीनिंग की व्यवस्था की जाए।
3. आयुष्मान भारत योजना का विस्तार कैंसर के संपूर्ण इलाज, जिसमें सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी शामिल हैं, को आयुष्मान भारत योजना के तहत 100 प्रतिशत कवर किया जाए। फाउंडेशन का कहना है कि वर्तमान में ₹5 लाख की सीमा कैंसर मरीजों के लिए पर्याप्त नहीं है।
4. सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार देश के प्रत्येक सरकारी मेडिकल कॉलेज में रेडियोथेरेपी यूनिट तथा डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर स्थापित किए जाएं, ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार मिल सके।
सुरेश पी. अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में निजी अस्पतालों में कैंसर के इलाज का खर्च 8 लाख से 20 लाख रुपये तक पहुंच जाता है, जबकि सरकारी अस्पतालों में मशीनों और सुविधाओं की कमी बनी हुई है। आर्थिक तंगी के कारण लगभग 60 प्रतिशत मरीज अपना इलाज बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि देश के लाखों गरीब कैंसर मरीजों को राहत देने के लिए जांच को सस्ता और सुलभ बनाना तथा इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।