कुजू (रामगढ़), झारखंड: सीसीएल की तोपा परियोजना स्थित लोकल सेल में कोयला लदे करीब 25 ट्रक लगातार सातवें दिन भी खड़े रहे। वाहनों की आवाजाही ठप रहने से कोयला कारोबारियों के साथ-साथ लोकल सेल में दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिकों के सामने आजीविका का संकट गहराता जा रहा है। लंबे समय से काम बंद रहने के कारण मजदूरों और कारोबारियों दोनों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन के परिवहन विभाग (डीटीओ) और खनन विभाग (डीएमओ) के अधिकारियों ने जांच के उद्देश्य से लोकल सेल से निकलने वाले कोयला लदे ट्रकों को रोक दिया था। हालांकि, सात दिन बीत जाने के बाद भी वाहनों के परिचालन को लेकर कोई नया निर्देश जारी नहीं किया गया है। इससे ट्रकों की आवाजाही अब भी पूरी तरह प्रभावित है।
इस बीच, दो ट्रकों का डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) निर्धारित अवधि समाप्त होने के कारण निरस्त हो गया, जिसके बाद उन वाहनों से कोयला उतारना पड़ा। कारोबारियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो उन्हें और अधिक आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
मामले में स्थानीय सीसीएल प्रबंधन और संबंधित विभागों के अधिकारी फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। इस कारण स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि बारलोंग बुध बाजार के समीप हाल में हुई सड़क दुर्घटना, जिसमें आठ लोगों की जान चली गई थी, उसके बाद मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने के मुद्दे पर सहमति नहीं बनने के कारण स्थिति उलझी हुई है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
जिस ट्रक से दुर्घटना हुई थी उस ट्रक पर तोपा सेल सेंटर से कोयला लोड हुआ था। यह चर्चा आम है कि दुर्घटना में मारे गये लोगों को मुआवजा देने के लिए सीसीएल प्रबंधन व सेल कमेटी पर दबाव दिया जा रहा है। वहीं लोग यह प्रश्न उठा रहे हैं कि जब ट्रक सेल सेंटर से कोयला लोड कर निकल गया तथा कई किलोमीटर दूर जा कर दुर्घटना ग्रस्त हो गया तो सीसीएल व सेल सेंटर मुआवजा क्यों दे।
लगातार जारी गतिरोध से ग्रामीणों, कोयला व्यवसायियों और तोपा परियोजना लोकल सेल संचालन समिति में नाराजगी बढ़ती जा रही है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर कोयला परिवहन के साथ-साथ सीसीएल की खनन गतिविधियों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।