रांची सदर अस्पताल की लिफ्ट में दो घंटे तक फंसा युवक, सुरक्षा व्यवस्था और इमरजेंसी सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

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युवक जो लिफ्ट में फंसा था। 

रांची (झारखंड) : राजधानी रांची के सदर अस्पताल स्थित 500 बेड वाले सुपर स्पेशियलिटी भवन में मंगलवार तड़के एक बड़ी लापरवाही सामने आई। अस्पताल की लिफ्ट में 28 वर्षीय युवक करीब दो घंटे तक फंसा रहा। काफी मशक्कत के बाद तकनीकी टीम और अस्पताल कर्मियों की मदद से उसे सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना के बाद अस्पताल की लिफ्ट सुरक्षा व्यवस्था, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम और संचालन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार नामकुम निवासी छोटू महतो अपनी परिजन से मिलने अस्पताल पहुंचे थे। उनकी रिश्तेदार अस्पताल के लेबर वार्ड में भर्ती थीं। मंगलवार सुबह करीब चार बजे वह सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग के ऊपरी तल से नीचे आने के लिए लिफ्ट में सवार हुए। इसी दौरान बीच रास्ते में लिफ्ट अचानक बंद हो गई। कुछ समय के लिए अंदर अंधेरा छा गया, जिससे युवक घबरा गया और मदद के लिए आवाज लगाने लगा।

बताया जाता है कि युवक ने मोबाइल से संपर्क करने का प्रयास भी किया, लेकिन किसी से बात नहीं हो सकी। काफी देर तक उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं मिला। लगभग एक घंटे बाद वहां से गुजर रही एक नर्स ने लिफ्ट के भीतर से मदद की पुकार सुनी और अस्पताल प्रबंधन को इसकी सूचना दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मौके पर मौजूद लोगों ने संबंधित ऑपरेटरों और तकनीकी कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन तत्काल सहायता उपलब्ध नहीं हो सकी।

करीब सुबह छह बजे तकनीकी कर्मियों और अन्य कर्मचारियों के सहयोग से लिफ्ट का दरवाजा खोलकर युवक को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाहर आने के बाद उसने पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत अस्पताल प्रशासन को भी सौंपी।

रात के समय लिफ्ट में तकनीकी दिक्कतें आने की शिकायत

अस्पताल में मरीजों और परिजनों की आवाजाही के लिए कुल 10 लिफ्ट संचालित हैं। इनमें 10 यात्रियों की क्षमता वाली छह लिफ्ट तथा 15 यात्रियों की क्षमता वाली चार लिफ्ट शामिल हैं। अस्पताल आने वाले लोगों का कहना है कि विशेषकर रात के समय बिजली आपूर्ति में बाधा या तकनीकी खराबी के कारण कई बार लिफ्ट बीच में रुक जाती है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी भी पर्याप्त नहीं होती।

मेंटेनेंस व्यवस्था पर भी उठे सवाल

घटना के बाद प्रत्यक्षदर्शियों ने आशंका जताई कि लिफ्ट का सेंसर या ऑटोमेटिक रेस्क्यू सिस्टम सही ढंग से काम नहीं कर रहा था। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा तंत्र पूरी तरह सक्रिय होता तो इतनी लंबी अवधि तक कोई व्यक्ति लिफ्ट में फंसा नहीं रहता।

सूत्रों के अनुसार अस्पताल की एयर कंडीशनिंग व्यवस्था संभालने वाली एजेंसी को ही लिफ्टों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि लिफ्टों के संचालन और रखरखाव पर हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, बावजूद इसके सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षित स्तर की नहीं दिख रही है।

तीन ऑपरेटरों के भरोसे चल रही लिफ्ट व्यवस्था

जानकारी के अनुसार 500 बेड वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की सभी लिफ्टों की निगरानी सीमित संख्या में कर्मचारियों के भरोसे चल रही है। अस्पताल में पहले आउटसोर्सिंग के माध्यम से अधिक संख्या में लिफ्ट ऑपरेटर तैनात किए गए थे, लेकिन बाद में कई कर्मियों को अन्य कार्यों में लगा दिया गया। वर्तमान में उपलब्ध ऑपरेटरों की संख्या अस्पताल की आवश्यकता की तुलना में काफी कम बताई जा रही है।

स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने मांग की है कि अस्पताल में लिफ्ट संचालन के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित ऑपरेटर तैनात किए जाएं, सभी लिफ्टों की नियमित तकनीकी जांच कराई जाए तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।