रामगढ़ कैंट (झारखंड) : रामगढ़ की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था कैप्सूल कोर्स सह निःशुल्क शिक्षा दान केंद्र, नई सराय में संस्थापक एवं रामगढ़ सब डिवीजन के मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव रविशंकर राय के दादाजी स्व. बलिवंत राय की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं समाजसेवा के कार्यों को याद किया गया।
रविशंकर राय ने कहा कि स्व. बलिवंत राय एक मध्यमवर्गीय परिवार से थे, जिन्होंने अपनी मेहनत, ईमानदारी और लगन के बल पर समाज में सम्मानजनक पहचान बनाई। मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के निवासी स्व. बलिवंत राय बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उनकी सादगी, कर्मठता और लोकप्रियता आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
उन्होंने बताया कि स्व. बलिवंत राय के प्रथम पुत्र लालबाबू जी ने झारखंड के रामगढ़ जिले के विभिन्न थानों में अपनी सेवाएं दीं, जबकि द्वितीय पुत्र टूनटून जी ने भी सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए परिवार की प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाया।
रविशंकर राय ने कहा कि उनके दादाजी ने जीवन में गरीबी और संघर्ष को करीब से देखा था। उन्हीं के आदर्शों से प्रेरित होकर वे पिछले 31 वर्षों से गरीब, असहाय, निर्धन, मेधावी, दिव्यांग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं को निःशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नई सराय स्थित दामोदर नदी तट पर पिछले 26 वर्षों से निःशुल्क शिक्षा दान केंद्र संचालित किया जा रहा है, जहां आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है।
उन्होंने बताया कि स्व. बलिवंत राय की स्मृति में जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता, गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग तथा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से छायादार वृक्षों का भी रोपण किया गया है। साथ ही, बिहार के गड़हनी में “अरुणावली विद्या विहार” नामक एक विद्यालय की नींव रखी गई है, जहां भविष्य में गरीब एवं निसहाय बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
अपने संबोधन में रविशंकर राय ने कहा कि पूर्वजों को याद करना तभी सार्थक है, जब उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार के साथ-साथ समाज के प्रति भी अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए, ताकि पूर्वजों की कीर्ति और उनके संस्कार आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रह सकें।