नई दिल्ली : भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश के कुछ लोकप्रिय शराब ब्रांड्स के चुनिंदा वेरिएंट्स की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई Bagpiper, Royal Challenge, Old Monk, McDowell’s No.1 Rum समेत कुछ अन्य उत्पादों के खिलाफ की गई है। हालांकि, यह प्रतिबंध पूरे ब्रांड पर नहीं बल्कि केवल उन विशिष्ट वेरिएंट्स और कुछ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर लागू है, जिनमें नियमों के उल्लंघन पाए गए हैं।
क्या है मामला ?
FSSAI की जांच में पाया गया कि कुछ शराब उत्पादों में Artificial या Nature-Identical Flavouring Substances का उपयोग किया गया था। नियामक के अनुसार, व्हिस्की या रम के स्वाद और सुगंध को कृत्रिम फ्लेवर से तैयार करना निर्धारित मैन्युफैक्चरिंग मानकों के अनुरूप नहीं है। ऐसे उत्पादों को खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत “Sub-standard” माना गया।
ओल्ड मोंक के दावे पर भी आपत्ति
FSSAI ने Old Monk XXX Rum के एक वेरिएंट पर लिखे “7 Years Old Blended” दावे को भी भ्रामक बताया। जांच में यह दावा निर्धारित लेबलिंग नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया, जिसके कारण संबंधित उत्पाद पर भी कार्रवाई की गई।
क्या यह स्वास्थ्य के लिए खतरे का मामला है ?
FSSAI ने स्पष्ट किया है कि यह मामला नकली शराब या स्वास्थ्य के लिए तत्काल खतरे से जुड़ा नहीं है। कार्रवाई का कारण मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग स्टैंडर्ड्स, फ्लेवरिंग नियमों और लेबलिंग मानकों का उल्लंघन है। इसलिए उपभोक्ताओं को इसे जहरीली या नकली शराब से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
कंपनियों ने क्या कहा ?
कुछ प्रभावित कंपनियों ने FSSAI के आदेश को चुनौती दी है। उनका कहना है कि संबंधित उत्पादों की लेबलिंग वर्तमान नियमों के अनुरूप है और यह मुद्दा पूरे उद्योग से जुड़ा है। कुछ मामलों में अपील के बाद नियामक ने संशोधित लेबल के साथ मौजूदा स्टॉक की बिक्री की सशर्त अनुमति भी दी है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या मतलब ?
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पूरे ब्रांड पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
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केवल कुछ राज्यों की चुनिंदा उत्पादन इकाइयों में बने विशेष वेरिएंट प्रभावित हुए हैं।
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बाजार में उपलब्ध अन्य वैध वेरिएंट की बिक्री सामान्य रूप से जारी रह सकती है।
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भविष्य में कंपनियों को FSSAI के मैन्युफैक्चरिंग और लेबलिंग मानकों का सख्ती से पालन करना होगा।