सोशल मीडिया पर नाबालिगों के अकाउंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का अग्रगति ने किया स्वागत

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रामगढ़ कैंट, झारखंड :  रामगढ़ जिले में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर अभियान चला रहे संगठन अग्रगति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नाबालिगों की पहुंच और सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का स्वागत किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस संभावना पर विचार करने को कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए ऐसे वैधानिक नियम बनाए जाएं, जिनके तहत उन्हें नाबालिगों से संबंधित भारतीय कानूनों का पालन करना अनिवार्य हो। यह मामला नागरिक समाज संगठनों के देश के बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस (JRC) की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है।

याचिका में डिजिटल प्लेटफॉर्मों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई थी कि नाबालिगों को ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंच देने के दौरान उनकी कानूनी स्थिति और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों का पालन किया जाए। संगठन का कहना है कि नाबालिगों को स्वतंत्र रूप से अनुबंध करने का कानूनी अधिकार नहीं है, इसलिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनकी सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय लागू किए जाने चाहिए।

अग्रगति के निदेशक किरण शंकर दत्त ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारतीय कानूनों के अनुरूप संचालित हों। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन दुनिया में बच्चों के सामने यौन शोषण, ट्रैफिकिंग, सेक्सटॉर्शन, निजी डेटा के दुरुपयोग और साइबर बुलिंग जैसे कई खतरे मौजूद हैं। ऐसे में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।

उन्होंने कहा कि नाबालिगों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण और अन्य अपराधों का शिकार बनाए जाने का खतरा रहता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से ऑनलाइन माध्यमों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर नियामकीय व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।

अग्रगति, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) का सहयोगी संगठन है। संगठन के अनुसार, जेआरसी अपने सहयोगी संगठनों के साथ देश के सभी 782 जिलों में बाल अधिकारों के संरक्षण को लेकर अभियान चला रहा है।

मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।

पीठ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ स्वतंत्र रूप से अनुबंध करने के लिए 18 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यह व्यवस्था केवल दिशानिर्देश तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से इसे इंटरमीडियरी नियमों के ढांचे में शामिल करने की संभावना पर विचार करने को कहा।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि इंटरमीडियरी नियमों के तहत ऐसे निर्देश जारी किए जाने चाहिए, जिससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सॉफ्टवेयर और संचालन भारतीय कानूनों के अनुरूप हो। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार इस मुद्दे की जांच करेगी और आवश्यक कदम उठाएगी।