रामगढ़, झारखंड: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की केंद्रीय कमेटी के आह्वान पर मंगलवार को रामगढ़ जिले के सुभाष चौक पर सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य सरना धर्म कोड को लागू कराने की मांग और जातीय जनगणना को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करना था।
जिला संयोजक प्रमुख विनोद किस्कू ने धरना को संबोधित करते हुए कहा कि “भाजपा सरना धर्म कोड को दरकिनार कर जातीय जनगणना का कुत्सित प्रयास कर रही है। जब तक सरना धर्म कोड को कानूनी मान्यता नहीं दी जाती, तब तक झारखंड में जातीय जनगणना आदिवासियों के साथ धोखा ही कहलाएगी।” उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार ने 11 नवंबर 2020 को विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर सरना धर्मकोड विधेयक पारित किया था, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।
उन्होंने जोर देकर कहा कि “जल, जंगल, जमीन हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान हैं, और इन्हीं पर आधारित सरना धर्म की मान्यता हमारी अस्मिता से जुड़ा मुद्दा है।”
प्रदर्शन से पूर्व झामुमो कार्यकर्ताओं ने पार्टी के जिला कार्यालय से झंडा-बैनर के साथ रैली निकाली, जो नारेबाजी करते हुए सुभाष चौक पहुंची और धरना प्रदर्शन में परिवर्तित हो गई। कार्यक्रम का संचालन बिनोद महतो ने किया।
इस प्रदर्शन में शामिल प्रमुख लोग:
राजकुमार महतो, सुन्नु महतो, सोनाराम मोझी, चित्रगुप्त महतो, गोरंग राय, महेन्द्र मुण्डा, हरिलाल बेदिया, अशोक वर्मा, बरतु करमाली, गीता विश्वास, महेश ठाकुर, खुर्शीद आलम, अरुण बनर्जी, नरेश हांसदा, जग्गु करमाली, मुमताज मंसूरी, योगेन्द्र यादव, रामकिशुन गिरि, संतोष कुमार, सागीर खान, गीता देवी, दीपक हुडू, मंतोष सिंह, सतीष मुई, विजय किस्कू, सुशान्त भारती, साजिद आलम, उदय अग्रवाल, सुशील कुमार, उदय मालाकार, जगरनाथ महतो, बबलू यादव, अकल उरांव, लालबहादुर चौधरी, राजकुमार साव, सुरेश चन्द्र पटेल, इजहार अंसारी, बिड्डु खान समेत सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरना धर्म कोड की मांग को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो राज्य भर में आंदोलन और तेज किया जाएगा।