जिले भर में भारी हेराफेरी के साथ सरकारी राजस्व का नुकसान पहुंचा सीजन खत्म होने पर बंद हुये ईंट भट्ठे

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करोड़ों के राजस्व का नुकसान पहुंचा कर सफलता पूर्वक संचालित हो बंद हुये ईंट भट्ठे

इस सीजन में पहली बार कुछ ओहदेदारों को प्रति ईंट भट्ठे एक बार राशि सलामी के तौर पर मिली

रामगढ़, झारखंड: हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान पहुंचा कर जिले भर के ईंट भट्ठों का संचालन इस वर्ष बंद हो गया। अमूमन तौर पर बरसात के बाद अक्तूबर माह के अंत से ईंट भट्ठों के संचालन की प्रक्रिया प्रारंभ होती है तथा जून में मॉनसून आने से पहले संचालन की प्रक्रिया समाप्त कर दी जाती है। जिले भर के लगभग 125-130 ईंट भट्ठों में मई माह के मध्य तक अंतिम चक्र की फायरिंग हो जाती है। जिला में ईंट भट्ठों के संचालन में बड़ा रैकेट काम करता है तथा अवैध कोयला से लेकर रायल्टी समेत कई अन्य कार्यों में सरकार कोे राजस्व का नुकसान पहुंचाया जाता है। विगत कई वर्षों से यह प्रक्रिया निरंतर चली आ रही है। ईंट भट्ठे अवैध कोयला से चलाया जाता है तथा दिखावे के लिए एक दो गाड़ी कोयला का पेपर रखा जाता है। पूर्व के वर्षों में दिखावे के लिए एकाध ईंट भट्ठों में छापामारी की होती थी। लेकिन इस वर्ष मामला इतना मैनेज था कि फॉर्मलिटी के लिए भी कोई छापामारी नहीं हुयी तथा सब कुछ मैनेज तरीके से चला व ईंट भट्ठों का संचालन अब बंद भी हो गया।

एक विभाग ने प्रति ईंट भट्ठे एक लाख 15 हजार रुपये वसूले

सूत्र बताते हैं कि जिले भर में ईंट भट्ठों के संचालन में करोड़ों की हेराफेरी होती है। जिले का एक मजबूत सरकारी विभाग जिससे सभी स्तर के लोग डरते हैं। भट्ठों में अवैध कोयला के उपयोग के एवज में उस विभाग द्वारा इस वर्ष प्रति ईंट भट्ठा प्रतिमाह एक लाख 15 हजार रुपये लिये गये। इस विभाग के विभिन्न क्षे़त्रों में स्थित केंद्रों के प्रभारियों द्वारा इस राशि की वसूली की गयी तथा उपर के लोगों को उनके ओहदे के अनुसार उनकी हिस्सेदारी दी गयी। मजेदार तथ्य यह है कि विभिन्न केंद्रों में प्रभारियों को राशि वसूल कर पहुंचाने वाले व्यक्ति ने भी अपने लिए पारिश्रमिक के तौर पर एक हजार रुपया लिया तथा एक लाख 16 हजार की राशि वसूल की गयी। साथ ही इसी विभाग का काम मीडिया को भी सेट करना होता है। मीडिया कर्मियों को उनके कद व मीडिया हाउस के हिसाब से जब तक ईंट भट्ठा चला है तब तक प्रतिमाह सक निश्चित राशि प्रदान की जाती रही है। अब ईंट भट्ठों का संचालन बंद हो गया है तथा पुनः संचालन प्रारंभ होने पर फिर से राशि को मिल बैठ कर तय किया जाएगा।

जिला स्तर, अनुमंडल व अंचल स्तर के लिए एक निश्चित राशि सलामी के तौर पर वसूली गयी

ईंट भट्ठा सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष पहली बार जिला, अनुमंडल व अंचल स्तर के ओदेदारों के लिए एक निश्चित राशि सलामी के तौर पर दी गयी। जिला स्तर के ओहदेदार के लिए प्रति ईंट भट्ठा 50 हजार रुपया, अनुमंडल स्तर के ओहदेदार के लिए प्रति ईंट भट्ठा 10 हजार रुपया तथा अंचल स्तर के ओहदेदारों के लिए प्रति ईंट भट्ठा 10 हजार रुपया सलामी की तौर पर दी गयी। जिला में एक ही अनुमंडल है। इसलिए उसके ओहदेदार कोे लिए पूरे जिला के ईंट भट्ठों से राशि मिली। जबकि अंचल स्तर के ओहदेदार को केवल उसके अंचल क्षेत्र में स्थित ईंट भट्ठे के लिए राशि दी गयी। यहां भी राशि वसूलने वाले ने एक हजार रुपया प्रति ईंट भट्ठा पारिश्रमिक वसूला गया। अब ईंट भट्ठों का संचालन बंद हो गया है तथा पुनः संचालन प्रारंभ होने पर फिर से इस स्तर पर राशि को मिल बैठ कर तय किया जाएगा।

कई और स्तर पर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाया जाता है

ईंट भट्ठों के संचालन में कई और नियमों की अवहेलना विगत कई वर्षाें से की जाती रही है तथा इस वर्ष भी की गयी। सर्वोच्च न्चायालय के आदेश से ईंट भट्ठा स्थल पर स्थायी चिमनी तो लगा दी गयी। लेकिन धुंआ छोड़ने से पूर्व पानी के हौद से धुंआ को गुजारने की प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती। हर भट्ठा पांच से छह चक्र ईंट का उत्पादन करते हैं। लेकिन कम चक्र का उत्पादन दिखा कर रॉयल्टी का नुकसान सरकार को पहुंचाते हैं। ईंट निर्माण में कुछ बालू का भी उपयोग होता है। बालू सीधे घाटों से उठा कर ईंट भट्ठों में लाया जाता है तथा किसी को कोई भुगतान नहीं किया जाता है।

हर स्तर पर राजस्व के नुकसान से किया गया इंकार

ईंट भट्ठेदार व हर स्तर के ओहदेदार इस भट्ठों के संचालन में राजस्व चोरी व गड़बड़ी से इंकार करते हैं। लेकिन कई बातें व चीजें ऐसी है। जिससे गड़बड़ी व राजस्व चोरी की बात स्पष्ट तौर पर सामने आ जाएगी। वैसे अब ईंट भट्ठों का संचालन बंद हो चुका है तथा यह बात आयी गयी हो गयी है। अगली बार पुनः संचालन से पूर्व सारी बातें तय होगी तथा रिकार्ड को देखते हुये कहा जा सकता है कि अगली बार भी सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाया जाएगा।