मजदूर नेता मिथिलेश सिंह का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

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मिथिलेश सिंह की पहचान जुझारू, संघर्षशील व स्पष्ट वादी नेता के रूप में थी

रामगढ़, झारखंड: रामगढ़ कोयलांचल के प्रख्यात व लोकप्रिय वामपंथी नेता मिथिलेश सिंह का शुक्रवार को रामगढ़ के कैथा स्थित एक निजी अस्पताल में निधन हो गया है। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे रामगढ़ कोयलांचल में शोक की लहर फैल गयी है। उनका अंतिम संसकार शनिवार को गिद्दी में दामोदर नद के किनारे किया जाएगा।

संघर्षशील मजदूर नेता के रूप में मिथिलेश सिंह की पहचान थी

संघर्षशील व मजदूरों के मुखर होकर लड़ने वाले नेता के रूप मे मिथिलेश सिंह की पहचान थी। वे वर्ष 1973-74 में कोलियरियों के राश्ट्रीयकरण से पूर्व गिद्दी क्षेत्र के हेसालौंग कोलियरी में काम करने आये थे। यहीं से उन्होंने मजदूर राजनीति में कदम रखा। इसके बाद 1975 में इमरजेंसी लगने के बाद उन्हें जेल जाना पड़ा तथा उन पर मीसा एक्ट लगा। वे लगभग दो वर्ष हजारीबाग जेल में रहे। हजारीबाग केंद्रीय कारा में ही मिथिलेश सिंह की मुलाकात बड़े वामपंथी नेता एके राय से हुई। उनके सानिघ्य में उन्होंने वामपंथ को जाना। जेल से छूटने के बाद उन्होंने मोटर कामगार यूनियन से जुड़ कर मजदूरों की राजनीति करने लगे। इसी बीच सांसद बनने के बाद एके राय जेल से छूटे तथा माकपा से अलग होकर मार्क्सवादी समन्वय समिति (मासस) का गठन किया। मिथलेश सिंह भी मासस में शामिल हो गये तथा बीसीकेयू व सीटू आदि से जुड़ कर राजनीति करने लगे। अभी हाल के दिनों में मासस का विलय भाकपा माले में हो गया तथा वे भाकपा माले से जुड़ गये। वे अभी भी बीसीकेयू से जुड़े हुये थे।

क्षेत्र में जुझारू नेता के रूप में चर्चित रहे मिथिलेश सिंह

रामगढ़ कोयलांचल में मिथिलेश सिंह जुझारू नेता के रूप में चर्चित रहे। प्रसिद्ध उद्योगपति रामचंद्र रुंगटा से मजूदरों को लेकर हुये विवाद को आज भी लोग याद करते हैं। इस विवाद में मिथिलेश सिंह को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा था। साथ ही 26 जुलाई 1991में रैलीगढ़ा में हुए मासस व माले समर्थकेां में हुये खूनी संघर्ष में भी इनका नाम आया। क्षेत्र में कई आंदोलनों का नेतृत्व उन्होंने किया। उनकी पहचान जुझारू, संघर्षशील व स्पष्ट वादी नेता के रूप में थी। उनके निधन से पूरे कोयलांचल में शोक की लहर फैल गयी है। लोगों की भीड़ उनके आवास पर जुटी हुई है। कल गुरुवार को मजदूर नेता चंद्रशेखर दूबे उर्फ ददई दूबे का निधन और लगातार दूसरे दिन वामपंथी मजदूर नेता मिथिलेश सिंह का निधन मजदूर राजनीति पर बड़ा आघात है। जिसकी भरपाई नहीं हो सकती है।