कुजू (रामगढ़), झारखण्ड : जिला के कुजू क्षेत्र में स्थित भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण देश की खनिज अन्वेषण एवं भूवैज्ञानिक अनुसंधान का प्रमुख संस्थान है। मंगलवार को फील्ड प्रशिक्षण केंद्र, एफटीसी कुजू के नवपुनर्निर्मित परिसर का उद्घाटन किया गया । परिसर का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि भारत सरकार के कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने फीता काटकर किया। उनके साथ भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के महानिदेशक असित साहा,अपर महानिदेशक एवं पूर्वी क्षेत्र की विभागाध्यक्ष वर्षा अशोक अगलावे, उप महानिदेशक एवं विभागाध्यक्ष जीएसआई प्रशिक्षण संस्थान डॉ एस रवि,झारखंड राज्य इकाई के उप महानिदेशक अखौरी बिश्वप्रिया, एफटीसी कुजू निदेशक प्रभाकर लाकड़ा एवं , एफटीसी कुजू के प्रशिक्षण संकाय डॉ. रवि शंकर चौबे उपस्थित थे।
एफटीसी कुजू भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण का एक प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक फील्ड प्रशिक्षण केंद्र हैl जिसकी स्थापना वर्ष 1975 में की गई थी। यह केंद्र तलछटी भूविज्ञान, कोयला अन्वेषण,अनुक्रम स्तरीकरण एवं संसाधन आकलन जैसे व्यावहारिक विषयों में विशेष दक्षता रखता है। यह नवनियुक्त भूवैज्ञानिक अधिकारियों के लिए अनिवार्य ओरिएंटेशन से लेकर उन्नत प्रशिक्षण तक की व्यवस्था करता हैl अब तक 48 बैचों के वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित कर चुका है।
ओएनजीसी, ऑयल इंडिया लिमिटेड, सीआईएल, सीएमपीडीआई जैसी अग्रणी संस्थाओं और कई विश्वविद्यालयों के लिए भी यह एक पसंदीदा प्रशिक्षण स्थल रहा है। इसके अतिरिक्त, “भूविसंवाद” जैसे संवादात्मक मंचों के माध्यम से यह केंद्र शोधकर्ताओं, छात्रों और विद्यार्थियों को भी भूविज्ञान के प्रति जागरूक और प्रेरित करता रहा है। हाल ही में एफटीसी कुजू का व्यापक नवीनीकरण किया गया हैl जिसके तहत एक आधुनिक परिसर का निर्माण हुआ है। इसमें स्मार्ट व्याख्यान कक्ष, सम्मेलन हॉल, कार्यालय भवन, योग केंद्र, व्यायामशाला, खेल सुविधाएँ, रसोई-भोजनालय, वीआईपी और अतिथि कक्ष जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
परिसर को सौर ऊर्जा और वर्षा जल संचयन हरित तकनीकों से भी सुसज्जित किया गया हैlपरिसर को सौर ऊर्जा और वर्षा जल संचयन जैसी हरित तकनीकों से भी सुसज्जित किया गया हैl जो इसे पर्यावरणीय प्रतिबद्धता का आदर्श उदाहरण बनाता है। यह नवपरिवर्तित परिसर प्रशिक्षण, सहयोग और नवाचार की भावना को और अधिक सशक्त बनाएगा।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य कोयला मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों और अधिकारियों को उनके समर्पण, परिश्रम और उत्कृष्ट योगदान के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि जीएसआई ने अपने 175 वर्षों के गौरवशाली इतिहास में भारत की खनिज सम्पदा की खोज और वैज्ञानिक अध्ययन में अतुलनीय योगदान दिया है। चाहे कोयला, लौह, तांबा, सोना, बॉक्साइट जैसे स्थलीय खनिज हों या समुद्री तल से प्राप्त पॉलीमेटालिक नोड्यूल्स और गैस हाइड्रेट्स, जीएसआई ने हमेशा देश की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की दिशा में हैदराबाद स्थित भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण प्रशिक्षण संस्थान (जीएसआईटीआई ) तथा इसके अंतर्गत कुजू जैसे फील्ड प्रशिक्षण केंद्रों ने नवाचार और गुणवत्ता में एक नई मिसाल कायम की है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नवजीवित केंद्र देश की खनिज आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा। महानिदेशक असित साहा ने बताया कि स्वतंत्रता पूर्व काल में प्रशिक्षण असंगठित रूप से होता था और अधिकारियों को विदेशों में अध्ययन हेतु भेजा जाता था। लेकिन जैसे-जैसे भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण का कार्यक्षेत्र विस्तृत हुआ, संगठित प्रशिक्षण की आवश्यकता अनुभव की गई। इसी उद्देश्य से 1976 में हैदराबाद में जीएसआईटीआई की स्थापना हुई और कुजू स्थित यह फील्ड प्रशिक्षण केंद्र इस संस्थान की रीढ़ बना।
इस अवसर पर मंत्री ने एफटीसी कुजू परिसर में वृक्षारोपण कर हरित पहल की शुरुआत की और एफटीसी की प्रमुख गतिविधियों का अवलोकन भी किया। यह आयोजन केवल एक उद्घाटन समारोह नहीं था, बल्कि भारत की खनिज क्षमता निर्माण, पर्यावरणीय संतुलन और वैज्ञानिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी सिद्ध हुआ।