सुलगते सवाल : अतिक्रमण हटाओ अभियान में क्या बिहार फाउंड्री की ज़मीन की भी होगी जांच?

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सरकारी ज़मीनों पर अतिक्रमण के खिलाफ रामगढ़ उपायुक्त की सख्ती

रामगढ़ : रामगढ़ के उपायुक्त चंदन कुमार ने जिले में सरकारी भूमि और घटते जलस्तर के मद्देनज़र तालाबों व अन्य सार्वजनिक भूखंडों पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। इसी क्रम में शनिवार को उपायुक्त ने रांची रोड स्थित मरार के खाता संख्या एक की जमीन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि लगभग 141 एकड़ गैरमजरुआ भूमिए खाता संख्या एक प्लॉट संख्या 14023 पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हुआ है। इस भूमि पर कई लोगों ने अवैध रूप से घर और मकान बना लिए हैं। यही नहींए इसी खाता संख्या में औद्योगिक क्षेत्र मरारए रांची रोड भी शामिल है। जहां कुछ फैक्ट्री भी संचालित हो रही है। जिन्हें इस खाता से जमीन आवंटित की गयी थी। उपायुक्त ने मौके पर निरीक्षण के बाद रामगढ़ अंचल अधिकारी को पत्र जारी कर तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और इस जमीन पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिहार फाउंड्री ने भी सरकारी जमीन का अतिक्रमण कर रखा है

स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र मरार में संचलित बिहार फाउंड्री ने भी सरकारी जमीन का बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर रखा है बिहार फाउंड्री ने कथित रूप से कई फैक्ट्रियों की जमीन खरीदने के अतिरिक्त सरकारी भूमि पर भी कब्जा कर लिया है। प्रारंभिक जानकारी में यह भी सामने आया है कि पहले फैक्ट्री का मलबा सरकारी भूमि पर रखा जाता थाए बाद में उस ज़मीन को भी फैक्ट्री परिसर में मिला लिया गया। औद्योगिक क्षेत्र मरार में प्रारंभ में लघु उद्योगों के लिए छोटे प्लॉट उद्यमियों को आवंटित किये गये थे। उस समय बिहार फाउंड्री को किस उद्योग के लिए प्लॉट उपलब्ध कराये गये तथा अभी कौन सा उद्योग चालू है। यह विचारणीय प्रश्न है।

शांतनु मिश्रा ने उठाई जांच की मांग

शांतनु मिश्रा

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव सह प्रवक्ता शांतनु मिश्रा ने उपायुक्त की कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि सरकारी ज़मीनों से अतिक्रमण हटाना एक सराहनीय कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज़मीन माफिया सरकारी ज़मीनों का हेरफेरी कर आम लोगों को गलत जानकारी देकर बेच रहे हैं। श्री मिश्रा ने यह भी कहा कि बिहार फाउंड्री द्वारा किए गए अतिक्रमण की गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग किया कि यह स्पष्ट किया जाए कि सरकार द्वारा बिहार फाउंड्री को कितनी ज़मीन आवंटित की गई थी और बाद में उसने कितनी ज़मीन अन्य स्रोतों से खरीदी। साथ हीए यह भी जांच होनी चाहिए कि बिहार फाउंड्री को किस उद्देश्य के लिए ज़मीन दी गई थी और वर्तमान में वहां किस प्रकार की औद्योगिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं और प्रदूषण फैला रही हैं।

 

क्या हटेगा अतिक्रमण ?

उपायुक्त द्वारा अतिक्रमण किये लोगो की  जानकारी के लिए सीओ को जारी पत्र

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उपायुक्त की इस सख्ती के बाद क्या खाता संख्या एक प्लॉट नंबर 14023 रकबा 141 एकड़ पर किए गए कथित अतिक्रमण को हटाया जा सकेगा । फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई से लोगों में उम्मीद जगी है कि सरकारी ज़मीनों को अतिक्रमण मुक्त कर उपयोगी विकास कार्यों में लगाया जा सकेगा।