महुआटुंगरी हादसे पर नया मोड़: अब सीसीएल ने दर्ज कराई एफआईआर, दूसरी ओर अधिकारियों पर केस से मचा बवाल

Spread the love

 

रामगढ़, झारखंड: रामगढ़ जिला के कुजू क्षेत्र स्थित सीसीएल करमा परियोजना में महुआटुंगरी चाल धंसने से हुई चार लोगों की मौत के बाद अब यह मामला गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। एक ओर जहां स्थानीय प्रशासन ने सीसीएल के अधिकारियों पर कार्रवाई की है, वहीं अब सीसीएल प्रबंधन ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है।

सीसीएल प्रबंधन ने दर्ज कराई एफआईआर, सात पर नामजद आरोप

हादसे के बाद सीसीएल के सुरक्षा विभाग के अधिकारी यासर अराफात की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में रवि महतो, रूपा देवी, बिहारी महतो, पानेश्वर महतो, लीलावती देवी, मुस्लिम अंसारी और एक अज्ञात व्यक्ति को नामजद किया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने मृतकों के परिजनों को बहला-फुसलाकर खतरनाक क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश कराया और सरकारी कार्य में बाधा डाली। सीसीएल की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आरोपियों की भीड़ ने उत्पादन को ठप कर लगभग 2500 टन कोयला और 4000 क्यूबिक मीटर ओबी का नुकसान किया।

प्रशासन ने भी दर्ज किया था मामला, अधिकारियों को बनाया आरोपी

उधर, मांडू अंचल अधिकारी के आवेदन पर पुलिस ने सीसीएल के कुजू प्रक्षेत्र केमहाप्रबंधक और सीसीएल करमा प्रोजेक्ट केपरियोजना पदाधिकारी पर भी मामला दर्ज किया है। यह कहा गया कि दुर्घटनास्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं थे और प्रशासन ने सीसीएल को दोषी ठहराया है। इस निर्णय को लेकर अब सरकार, प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

सीसीएल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने जताई नाराजगी, झूठी एफआईआर बताया

कोल माइंस ऑफिसर्स एसोसिएशन (सीएमओएआई) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सीसीएल अधिकारियों पर दर्ज एफआईआर को ‘झूठा और मनगढ़ंत’ बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि दुर्घटना निष्क्रिय खनन क्षेत्र में हुई, जहां पहले से ही चेतावनी बोर्ड और फेंसिंग मौजूद थी। बावजूद इसके असामाजिक तत्वों ने सुरक्षा गार्ड को पीटकर जबरन प्रवेश किया और अवैध खनन के दौरान हादसा हुआ।

एसोसिएशन ने प्रशासन के कदम को अधिकारियों की गरिमा के खिलाफ बताया और मांग की कि झूठी प्राथमिकी को तुरंत वापस लिया जाए। साथ ही असली दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। बयान में यह भी कहा गया कि ऐसी घटनाओं से ईमानदार अधिकारियों का मनोबल टूटता है।

अब निगाहें पुलिस-प्रशासन की अगली कार्रवाई पर

इस घटनाक्रम ने रामगढ़ जिले में अवैध खनन और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर स्थानीय लोग सीसीएल को दोषी मानते हैं, वहीं अधिकारी संघ इसे साजिश करार दे रहा है। अब देखना यह होगा कि पुलिस निष्पक्ष जांच कर किन्हें दोषी ठहराती है — अवैध खनन करने वाले, या सुरक्षा उपायों में चूक करने वाले?