रामगढ़ कैंट, झारखंड :गोला प्रखंड के तोयर गांव की रहने वाली मुन्नी देवी, एक साधारण आदिवासी महिला, आज अपने साहस, दृढ़ निश्चय और आत्मबल के बल पर हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। एक समय था जब वे आर्थिक तंगी, सामाजिक उपेक्षा और पारिवारिक अस्थिरता के गहरे दलदल में थीं, लेकिन आज वह ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की एक जीवंत मिसाल हैं।
संघर्ष की छाया में बीता जीवन
मुन्नी देवी का पारिवारिक जीवन कठिनाइयों से भरा था। पति मंशु करमाली की अनियमित आमदनी और चार बच्चों की जिम्मेदारी ने आर्थिक संकट को और भी गहरा बना दिया। परिस्थिति से विवश होकर उन्होंने महुआ शराब (हड़िया) बनाकर बेचने का कार्य शुरू किया। यह काम भले ही कुछ आमदनी दे रहा था, लेकिन सामाजिक दृष्टि से अपमानजनक था। समाज में उन्हें “शराब बेचने वाली” कहा जाने लगा, जिससे उनका आत्मसम्मान चकनाचूर होने लगा।
बदलाव की शुरुआत: जब आत्मसम्मान ने दस्तक दी
साल 2016 में उन्हें ‘सरस्वती महिला मंडल’ नामक स्वयं सहायता समूह (SHG) की जानकारी मिली। संकोच के बावजूद 28 अप्रैल 2016 को वे इस समूह से जुड़ गईं। यहीं से उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत हुई। इसके बाद उन्होंने तोयर आजीविका महिला ग्राम संगठन का भी हिस्सा बनना शुरू किया।
सरकार की योजना बनी संबल
समूह की बैठकों और प्रशिक्षणों के दौरान मुन्नी देवी को झारखंड सरकार की “फुलो-झानो आशीर्वाद अभियान (PJAA)” की जानकारी मिली। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को अवैध शराब निर्माण जैसे कार्यों से बाहर निकाल कर सम्मानजनक आजीविका से जोड़ना है।मुन्नी देवी ने इस योजना के तहत ₹20,000 का ब्याजमुक्त ऋण प्राप्त किया। इस राशि और अपनी बचत से उन्होंने दो गायें खरीदीं और पशुपालन की शुरुआत की। उन्होंने हड़िया बनाना पूरी तरह से छोड़ दिया और आत्मनिर्भरता की राह पर चल पड़ीं।
आत्मनिर्भरता की राह पर
गायों की देखभाल, दूध बिक्री और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ उन्होंने एक नई पहचान बनाई। पशुपालन से उन्हें प्रतिमाह ₹8,000 से ₹10,000 की आय होने लगी। उनके पति अब एक तीन-पहिया ऑटो चलाते हैं, जिससे परिवार को हर माह अतिरिक्त ₹7,000–8,000 की आमदनी हो रही है। कुल मिलाकर उनका वार्षिक पारिवारिक आय अब ₹1.5 लाख से अधिक है। उन्होंने बेटियों की शादी की, बेटे को शिक्षा दिलाई और अब वह प्राइवेट नौकरी कर रहा है।
प्रेरणा का प्रतीक बनीं मुन्नी देवी
मुन्नी देवी अब केवल एक सफल महिला नहीं, बल्कि एक सामाजिक प्रेरणा स्रोत हैं। वह गांव की अन्य महिलाओं को भी PJAA योजना से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।वे बताती हैं कि “आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता सबसे बड़ा धन है। सही दिशा, सहयोग और साहस से हर अंधेरा रोशन हो सकता है”
संदेश : बदलाव संभव है
मुन्नी देवी की कहानी यह दर्शाती है कि एक सही कदम, एक सशक्त इरादा और सही मार्गदर्शन किसी भी जीवन को दिशा दे सकता है। जहां कभी सामाजिक तिरस्कार था, वहीं अब सम्मान और प्रेरणा का स्थान है।
मुन्नी देवी आज ना केवल अपने परिवार की रीढ़ हैं, बल्कि रामगढ़ की हर महिला के लिए एक उम्मीद की किरण हैं।