रामगढ़, झारखंड:समाहरणालय के सभागार में 14 जुलाई सोमवार को हुई दिशा की बैठक की चर्चा जिला भर में जोरों पर है। सांसद की अध्यक्षता व उपायुक्त के संचालन में हुई इस बैठक की चर्चा इसलिए नहीं हो रही है कि इस बैठक में कोई विशेष निर्णय लिया गया। बल्कि इस बैठक की चर्चा एक विधायक प्रतिनिधि को लेकर हो रही है। बैठक में सांसद, मांडू विधायक व बड़कागांव विधायक स्वयं शामिल हुये। जबकि रामगढ़ विधायक ममता देवी बैठक में शामिल नहीं थी। उन्होंने बैठक में अपना प्रतिनिधि भेजा था। विधायक प्रतिनिधि के तौर पर ममता देवी ने अपने पति बजरंग महतो को बैठक में शामिल होने के लिए भेजा तथा वे शामिल हुये।
इसे लेकर जिला के राजनैतिक हलकों में चर्चा का बाजार गर्म है। इसे लेकर विधायक की पार्टी कांग्रेस में भी भुनभुनाहट है। हालांकि कांग्रेसी इस मामले में खुल कर नहीं बोल रहे हैं तथा कुछ भी कहने से बचते हैं। लेकिन विधायक प्रतिनिधि बनने की आस लगाये नेताओं को इससे निराशा हुई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि रामगढ़ विधायक ममता देवी द्वारा अपने पति बजरंग महतो को स्थायी तौर पर अपना विधायक प्रतिनिधि नियुक्त किया है या केवल 14 जुलाई 2025 को हुई दिशा की बैठक के लिए अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया था। बताया जा रहा है कि केवल इसी बैठक के लिए श्री महतो को विधायक ने प्रतिनिधि नियुक्त किया था। लेकिन जो भी हो इसे लेकर जिला के राजनैतिक हलकों में चर्चा का बाजार गर्म है।
अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने का अधिकार पूर्णतः विधायक को है तथा वे किसी को अपना प्रतिनिधि बनायें यह उनका अधकिार क्षेत्र है। विधायक अथवा सांसद प्रतिनिधि कोई संवैधानिक पद भी नहीं है। यह पद अब अपने समर्थकों की राजनैतिक महत्वकांक्षा पूरी करने तथा समर्थकों को अपने साथ जोड़े रखने के लिए सांसद व विधायक वितरित करते हैं। पूर्व में बड़े बड़े नेता पूरे क्षेत्र के लिए एक या दो प्रतिनिधियों को नियुक्त करते थे। लेकिन अब जिला, प्रखंड, हर विभाग में प्रतिनिधि नियुक्त किये जाते हैं। सांसद व विधायक प्रतिनिधियों की संख्या से विभिन्न कार्यालयों के लोग तो परेशान होते ही हैं। लोगों को भी समझ में नहीं आता कि सांसद विधायक से कोई काम पड़ने पर किस प्रतिनिधि को पकड़े। दिशा की बैठक में विधायक पति को विधायक प्रतिनिधि के तौर पर शामिल होेने को लेकर अन्य दलों के लोग भी चुस्की ले रहे हैं तथा अपने संपर्क के कांग्रेसी नेताओं से चर्चा कर रहे हैं। पूर्व में जिला में किसी भी सांसद विधायक द्वारा स्थायी व अस्थायी तौर पर अपने किसी नजदीकी रिश्तेदार को अपना प्रतिनिधि बनाये जाने का मामला लोगों की याद में नहीं है।