छाई डैम की जमीन पर बवाल: ग्रामीणों का उग्र विरोध, PVUNL का काम ठप, शनिवार को त्रिपक्षीय वार्ता

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पतरातू, रामगढ़ (झारखंड): पतरातू थर्मल पावर स्टेशन (PVUNL) द्वारा छाई डैम की 330 एकड़ जमीन पर बाउंड्री वॉल निर्माण को लेकर बलकुदरा सहित चार गांवों में भारी तनाव की स्थिति है। स्थानीय ग्रामीणों और विस्थापितों ने शुक्रवार को उग्र विरोध दर्ज कराते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया। प्रशासन को मौके पर पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती करनी पड़ी। बढ़ते तनाव को देखते हुए शनिवार को उपायुक्त की अध्यक्षता में त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की जाएगी, जिससे समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।

ग्रामीणों की दो टूक: “बिना मुआवजा जमीन नहीं देंगे”

ग्रामीणों का दावा है कि यह जमीन उनकी खातियानी संपत्ति है, जिसे बिना मुआवजा और रोजगार गारंटी के अधिग्रहित किया गया है। उनका कहना है कि सरकार और कंपनी ने उनके रोजगार, जीवन और सम्मान को नजरअंदाज किया है।

“यह जमीन हमारी मां है, इसे किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।”
— एक विस्थापित ग्रामीण महिला

छाई डैम की जमीन पर बवाल: ग्रामीणों का उग्र विरोध, PVUNL का काम ठप, शनिवार को त्रिपक्षीय वार्ता
मौके पर मौजूद नाराज़ ग्रामीण

JMM और विधायक का समर्थन: “यह अधिकारों की लड़ाई है”

बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी और झामुमो के वरिष्ठ नेता संजीव बेदिया मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह डर और दमन के बल पर कंपनी के पक्ष में काम कर रहा है।

“जब तक विस्थापितों की मांगें पूरी नहीं होतीं, बाउंड्री वॉल का काम नहीं होने देंगे।”
— रोशन लाल चौधरी, विधायक

छाई डैम की जमीन पर बवाल: ग्रामीणों का उग्र विरोध, PVUNL का काम ठप, शनिवार को त्रिपक्षीय वार्ता
विस्थापितों के समर्थन में पहुंचे विधायक रोशन लाल चौधरी

प्रबंधन का दावा: “भूमि पहले ही अधिग्रहित”

PVUNL के अपर महाप्रबंधक जियाउल रहमान ने बताया कि जिस जमीन पर निर्माण हो रहा है, वह पूर्व में अधिग्रहित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि विरोध क्यों हो रहा है, इसकी जानकारी जिला प्रशासन बेहतर दे सकता है।

प्रशासन का रुख: “समाधान के लिए वार्ता जरूरी”

रामगढ़ के एसडीओ अनुराग तिवारी ने बताया कि फिलहाल निर्माण कार्य स्थगित कर दिया गया है। शनिवार को होने वाली त्रिपक्षीय बैठक में प्रबंधन, विस्थापित और प्रशासन के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिसमें विवाद के समाधान की कोशिश की जाएगी।

संकट की जड़: जमीन, रोजगार और पहचान

चार गांवों के लोग इस विवाद को केवल जमीन का नहीं, बल्कि अधिकार, पहचान और जीवन यापन के साधन से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब तक स्थायी नौकरी या पुनर्वास का कोई लाभ नहीं मिला।

“हमें बंदूक के बल पर हमारी जमीन से हटाया जा रहा है।”
— विस्थापित मोर्चा अध्यक्ष

नज़र शनिवार पर, सवाल कई

अब सबकी निगाहें शनिवार की त्रिपक्षीय वार्ता पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन सभी पक्षों को विश्वास में लेकर कोई स्थायी समाधान निकाल पाएगा, या यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा?