विश्व प्रसिद्ध रागी जत्था ने रामगढ़ गुरुद्वारा साहिब में विशेष दीवान में बांधा समां

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गुरुद्वारा में मौजूद श्रद्धालु

रामगढ़ (झारखंड) : रामगढ़ गुरुद्वारा साहिब में रविवार की देर शाम  एक भव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में विशेष दीवान का आयोजन किया गया। इस दिव्य दीवान में विश्व प्रसिद्ध रागी जत्था भाई जोगेंद्र सिंह रियाड़ अपनी टीम के साथ शामिल हुए और गुरुवाणी की मधुर धुनों से पूरे परिसर को भक्तिमय कर दिया।कार्यक्रम की शुरुआत अरदास के साथ हुई, जिसके बाद भाई जोगेंद्र सिंह रियाड़ व उनके जत्थे द्वारा एक से बढ़कर एक शबद-कीर्तन प्रस्तुत किए गए। “बिन बोल्या सब किछ जांदा, किस आगे कीजिये अरदास”, “वाहेगुरु वाहेगुरु”, “जिथे जाए बहे मेरा सतगुरु” जैसे शब्दों को बेहद मधुर स्वर में प्रस्तुत कर संगत का हृदय जीत लिया। संपूर्ण गुरु-संगत मंत्रमुग्ध होकर शबद-कीर्तन का रसास्वादन करती रही और लगभग ढाई घंटे तक चले कार्यक्रम के दौरान वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक भावों से सराबोर रहा।

संगत ने लिया आध्यात्मिक लाभ

गुरुद्वारा परिसर में बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही, और श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से गुरुवाणी का आनंद लिया। संगत का उत्साह इस बात से स्पष्ट था कि कीर्तन समाप्त होने के बाद भी लोग उठने को तैयार नहीं थे। कार्यक्रम के दौरान भाई जोगेंद्र सिंह रियाड़ ने गुरुद्वारा साहिब के प्रधान परमदीप सिंह कालरा का विशेष रूप से धन्यवाद किया और कहा कि रामगढ़ की संगत का प्रेम अविस्मरणीय है।

 उपस्थिति श्रद्धालु महिला व पुरुष

विशेष दीवान में प्रधान परमदीप सिंह कालरा के साथ-साथ मित प्रधान अमरजीत सिंह सैनी, हैप्पी छाबड़ा, सचिव हरदीप सिंह होरा, हरपाल सिंह अरोड़ा, रघुवीर सिंह, जोगिंदर सिंह जग्गी, प्रीतम सिंह कालरा, नरेंद्र सिंह होरा, तेजिंदर सिंह सोनी, मनपाल सिंह सोनी, कुलजीत सिंह कालरा, जितेंद्र सिंह पवार, कुलवंत सिंह मारवाह, कमलजीत सिंह लांबा, रविंद्र सिंह छाबड़ा (बिट्टी), नरेंद्र सिंह चमन, बबलू छाबड़ा, हरमिंदर छाबड़ा, रिंटू छाबड़ा, गुरजीत सिंह होरा, यश छाबड़ा, गुरजीत सिंह सलूजा, सतपाल सिंह सलूजा सहित अन्य गणमान्य सदस्य मौजूद रहे।महिला श्रद्धालुओं में रणजीत कौर, चरणजीत कौर जोली, स्त्री सत्संग प्रधान बलविंदर कौर छाबड़ा, डॉ. मनबीर कौर, पम्मी गांधी, पिंकी सलूजा, महेंद्र कौर, विमला मेहरा, सुमी जोली, जस्प्रीत कौर, नीलम अरोड़ा, जसमीत कौर सोनी सहित कई संगत ने शिरकत की कार्यक्रम के अंत में गुरु का अटूट लंगर वितरित किया गया, जिसमें सभी संगत ने प्रसाद ग्रहण किया।