झारखंड में झारखंड में कोल इंडिया की सहायक कंपनियों ( सीसीएल, बीसीसीएल, सीएमपीडीआई ) में कार्यरत 72 हजार लोगों को इसका लाभ मिलेगा
कोलकाता ( वेस्ट बंगाल ) :कोल इंडिया की विभिन्न सहायक कंपनियों में कार्यरत लगभग 2.25 लाख कर्मियों को इस साल परफॉर्मेंस लिंक्ड रिवॉर्ड (पीएलआर) के रूप में 1 लाख 3 हजार रुपये बोनस मिलेगा। गुरुवार को कोलकाता में हुई मानकीकरण समिति की लंबी बैठक में इस पर सहमति बनी।
बैठक की शुरुआत में प्रबंधन और यूनियन के बीच मतभेद उभर आए थे। यूनियन 1.30 लाख रुपये बोनस की मांग पर अड़े हुए थे, जबकि प्रबंधन 98 हजार रुपये से आगे बढ़ने को तैयार नहीं था। रात करीब साढ़े 11 बजे यूनियन नेताओं ने बैठक का बहिष्कार भी कर दिया था। हालांकि बाद में फिर से बातचीत शुरू हुई और अंततः 1.03 लाख रुपये पर सहमति बनी।
झारखंड में भी कोयलाकर्मियों को यह राशि शुक्रवार 26 सितंबर 2025 को प्रदान की जाएगी । झारखंड में कोल इंडिया की सहायक कंपनियों ( सीसीएल, बीसीसीएल, सीएमपीडीआई ) में कार्यरत 72 हजार लोगों को इसका लाभ मिलेगा ।
पिछले वर्षों का बोनस (तुलनात्मक आंकड़े)
वर्षवार बोनस (पीएलआर)
2014 : ₹40,000 (बढ़ोतरी ₹6,500)
2015 : ₹48,500 (बढ़ोतरी ₹9,500)
2016 : ₹54,000 (बढ़ोतरी ₹5,500)
2017 : ₹57,000 (बढ़ोतरी ₹3,000)
2018 : ₹60,500 (बढ़ोतरी ₹3,500)
2019 : ₹64,700 (बढ़ोतरी ₹4,200)
2020 : ₹68,500 (बढ़ोतरी ₹2,800)
2021 : ₹72,500 (बढ़ोतरी ₹4,000)
2022 : ₹76,500 (बढ़ोतरी ₹4,000)
2023 : ₹85,500 (बढ़ोतरी ₹9,000)
2024 : ₹93,750 (बढ़ोतरी ₹8,250)
2025 : ₹1,03,000 (बढ़ोतरी ₹9,250)
बैठक में प्रबंधन की ओर से एमसीएल के सीएमडी उदय ए. काले, कोल इंडिया के निदेशक (एचआर) विनय रंजन, सीसीएल के निदेशक (एचआर) हर्ष नाथ मिश्र, सीएमपीडीआई के निदेशक शंकर नागाचारी, बीसीसीएल के निदेशक (एचआर) मुरली कृष्ण रमैया और एसईसीएल के निदेशक (एचआर) शामिल रहे।
यूनियन की ओर से बीएमएस के सुधीर गुर्डे व सुजीत सिंह, एचएमएस के शिवकांत पांडेय व शिवकुमार यादव, एटक के रमेंद्र कुमार, सीटू के डीडी रामानंदन, तथा इंडियन माइन वर्कर फेडरेशन के अध्यक्ष अनूप सिंह और महासचिव एसक्यू जमा मौजूद थे।
22 सितंबर को दिल्ली में होने वाली बैठक स्थगित कर दी गई थी, क्योंकि कोलकाता हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि इंडियन माइन वर्कर फेडरेशन के प्रतिनिधियों को भी समिति में शामिल किया जाए। बाद में यह बैठक कोलकाता में हुई और कई घंटे चली चर्चा के बाद सहमति बनी।