नई दिल्ली : मोदी सरकार ने मंगलवार को आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की संदर्भ शर्तों (टर्म्स ऑफ़ रेफ़रेंस) को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनधारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार के इस कदम से कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होती दिख रही है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल ब्रीफिंग में बताया कि आठवां वेतन आयोग अपनी सिफारिशें 18 महीनों के भीतर सरकार को सौंप देगा। आयोग का उद्देश्य वेतन ढांचे, पेंशन और भत्तों में आवश्यक सुधार सुझाना होगा ताकि महंगाई और आर्थिक संतुलन दोनों का ध्यान रखा जा सके।
समिति की संरचना :
नए वेतन आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई होंगी। उनके साथ प्रोफेसर पुलक घोष और पंकज जैन सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। यह एक अस्थायी समिति होगी जो अपने कार्यकाल में अंतरिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर सकती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि संदर्भ शर्तें तैयार करने के दौरान विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से परामर्श किया गया है। रिपोर्ट में यह भी ध्यान रखा जाएगा कि देश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ न बढ़े और राजकोषीय संतुलन बना रहे।
वेतन संशोधन की परंपरा :
भारत में हर 10 वर्ष में वेतन आयोग का गठन होता है। सातवां वेतन आयोग फरवरी 2014 में गठित हुआ था और इसे 1 जनवरी 2016 से लागू किया गया था। अगला संशोधित वेतनमान 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है।
सरकार ने यह भी कहा कि नए वेतनमान तभी लागू होंगे जब आयोग की सिफारिशें तैयार होकर मंत्रिमंडल की मंजूरी प्राप्त कर लेंगी। कर्मचारियों की यूनियनों ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे “लंबे इंतजार के बाद मिला बड़ा तोहफा” बताया है।
साभार: डीएएस दिल्ली