रांची, झारखंड :झारखंड के किडनी रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। अब किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों को राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। झारखंड सरकार ने राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची में किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू करने की दिशा में अहम कदम बढ़ाया है। इसके साथ ही भविष्य में अन्य सरकारी अस्पतालों में भी चरणबद्ध तरीके से यह सुविधा उपलब्ध कराने की योजना पर काम चल रहा है।
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार के उप सचिव ध्रुव प्रसाद द्वारा इस संबंध में पत्र जारी किया गया है। पत्र के अनुसार 9 जनवरी 2026 को पूर्वाह्न 11:30 बजे किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़ी एक महत्वपूर्ण एडवायजरी कमिटी की बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग अजय कुमार सिंह के कार्यालय कक्ष में होगी, जिसकी अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग करेंगे।
बैठक में फिलहाल रांची (झारखंड) के दो अस्पतालों रिम्स और राज हॉस्पिटल, रांची को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पंजीकरण एवं लाइसेंस दिए जाने पर विचार किया जाएगा। उपलब्ध संसाधनों, सुविधाओं और तय मानकों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं की अध्यक्षता में एक तकनीकी समिति का गठन किया जाता है। यह समिति संबंधित अस्पताल का स्थल निरीक्षण कर वहां मौजूद बुनियादी ढांचा, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, नेफ्रोलॉजी व यूरोलॉजी सेवाएं, ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, ब्लड बैंक सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं का विस्तृत मूल्यांकन करती है। निरीक्षण के बाद समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।
तकनीकी समिति की रिपोर्ट के आधार पर एडवायजरी कमिटी यह निर्णय लेती है कि अस्पताल किडनी ट्रांसप्लांट के लिए निर्धारित सभी मानकों और अर्हताओं को पूरा करता है या नहीं। सभी शर्तें पूरी होने पर अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्षता में अंतिम निर्णय लिया जाता है और संबंधित अस्पताल को किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस जारी किया जाता है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि रिम्स, रांची (झारखंड) में किडनी ट्रांसप्लांट सेवा शुरू होने से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। इससे मरीजों को समय पर उन्नत उपचार उपलब्ध होगा और झारखंड में उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाओं का विस्तार संभव हो सकेगा।