हजारीबाग (झारखंड) जेल ब्रेक मामले का खुलासा, फरार तीनों कैदी महाराष्ट्र के सोलापुर से गिरफ्तार

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हजारीबाग, झारखंड : लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा, हजारीबाग से फरार हुए तीन कैदियों को पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपियों को वापस हजारीबाग लाकर न्यायिक हिरासत में केंद्रीय कारा भेज दिया गया है। गिरफ्तारी की पुष्टि हजारीबाग एसपी अंजनी अंजन ने करते हुए पत्रकार सम्मलेन का आयोजन कर जानकारी दी ।

जानकारी के अनुसार, 31 दिसंबर की रात करीब 1:30 बजे तीनों कैदी जेल की खिड़की का रॉड काटकर बेडशीट के सहारे नीचे उतरे और आंतरिक दीवार लांघकर फरार हो गए थे। सुबह करीब 7 बजे पुलिस को इस जेल ब्रेक की जानकारी मिली थी। फरार कैदियों की पहचान देव भुईयां, राहुल रजवार और जितेंद्र रवानी के रूप में हुई है, जो धनबाद जिले के निवासी हैं। इनमें राहुल रजवार आजीवन कारावास की सजा काट रहा था, जबकि अन्य दो अलग-अलग मामलों में लंबी सजा भुगत रहे थे।

घटना के बाद पुलिस ने तीन विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। एक टीम तकनीकी साक्ष्यों पर काम कर रही थी, दूसरी टीम फरार होने के मार्ग का विश्लेषण कर रही थी, जबकि तीसरी टीम अलग-अलग स्थानों पर लगातार छापेमारी कर रही थी।

जांच में सामने आया कि जेल से भागने के बाद तीनों सबसे पहले सिंदूर चौक पहुंचे। वहां से ऑटो और पिकअप वाहन के जरिए वे इचाक, बरकट्ठा, बरही और कोडरमा होते हुए गया पहुंचे। गया से ट्रेन बदलते हुए वे जसीडीह पहुंचे, जहां करीब दो दिन तक पुणे जाने वाली ट्रेन का इंतजार किया। 4 जनवरी को जसीडीह-पुणे एक्सप्रेस से रवाना होकर 6 जनवरी की सुबह महाराष्ट्र के दौंड जंक्शन उतरे। इसके बाद बस और पैदल यात्रा कर वे सोलापुर जिले के करमाला थाना क्षेत्र पहुंचे, जहां एक ईंट-भट्ठा मालिक के यहां मजदूरी करने लगे। इसी दौरान पुलिस ने तीनों को धर दबोचा।

पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि जेल ब्रेक की साजिश देव भुईयां की अगुवाई में रची गई थी। वह पहले भी वर्ष 2020 में धनबाद जेल से फरार हो चुका है। देव भुईयां पर विभिन्न थानों में कुल 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जितेंद्र रवानी पर भी 9 मामले दर्ज हैं, जबकि राहुल रजवार पर एक मामला दर्ज है। तीनों कैदी पॉक्सो मामलों में दोषी पाए गए थे और एक ही वार्ड में रह रहे थे।

घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक की संयुक्त कमेटी का गठन किया गया है, जो जेल सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, ताकि भविष्य में सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।