भैरवा जलाशय परियोजना के 314 लंबित वादों के निष्पादन को हेमंत सरकार की स्वीकृति, जी.पी. रामगढ़ की पहल रंग लाई

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रामगढ़, झारखंड : रामगढ़ क्षेत्र से जुड़ी भैरवा जलाशय परियोजना के तहत लंबित मुआवजा मामलों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार ने 314 लंबित वादों के निष्पादन को स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह पहल जी.पी. रामगढ़ (सरकारी पक्ष) की ओर से उठाए गए कदम के बाद संभव हो सकी है।

बताया जाता है कि भैरवा जलाशय परियोजना के लिए वर्षों पहले बड़ी संख्या में रैयतों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। हालांकि लंबे समय तक मुआवजा राशि का भुगतान नहीं होने के कारण प्रभावित रैयतों में असंतोष बना हुआ था। कई मामलों में मुआवजे को लेकर वाद न्यायालय में लंबित चल रहे थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जी.पी. रामगढ़ संजीव अम्बष्ठ ने सरकार को पत्र लिखकर प्रभावित रैयतों को न्याय दिलाने की मांग की थी। उन्होंने प्रकरण संख्या 33/24 एवं 34/24 (दिनांक 16 जून 2024) के माध्यम से संबंधित फाइल सरकार को अग्रसारित की थी, ताकि लंबित मामलों का शीघ्र समाधान हो सके।

सरकार ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 314 वादों को राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से निष्पादित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह स्वीकृति पत्रांक 11/भू.अ. 01-03/2021 एवं ज्ञापांक 989 दिनांक 25 फरवरी 2026 के तहत जारी की गई है।

इन मामलों का निष्पादन 24 मार्च 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में किया जाएगा। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि वर्षों से लंबित मुआवजा विवादों का समाधान हो सकेगा और प्रभावित रैयतों को राहत मिलेगी।

जी.पी. रामगढ़ की ओर से बताया गया है कि इस संबंध में सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। वहीं 14 मार्च 2026 को आयोजित लोक अदालत के दिन यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि कुल कितने मामलों का निपटारा हुआ और रैयतों को कितनी मुआवजा राशि का भुगतान किया जाएगा।

इस निर्णय के बाद रामगढ़, Jharkhand क्षेत्र के रैयतों में उत्साह का माहौल है। खासकर आदिवासी रैयतों ने राज्य सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। साथ ही उन्होंने जी.पी. रामगढ़ संजीव अम्बष्ठ के प्रति आभार व्यक्त किया है, जिनकी पहल से लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी है।