नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत समाप्त करने का फैसला लिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत उन्हें पिछले साल हिरासत में लिया गया था और वे राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद थे। लगभग 170 दिन बाद अब उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को National Security Act के तहत हिरासत में लिया गया था। सरकार का कहना है कि वे इस कानून के तहत निर्धारित हिरासत अवधि का लगभग आधा समय जेल में बिता चुके हैं, इसलिए उनकी हिरासत को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सरकार लद्दाख में विभिन्न सामाजिक संगठनों, सामुदायिक नेताओं और अन्य हितधारकों के साथ लगातार बातचीत कर रही है ताकि क्षेत्र के लोगों की चिंताओं और मांगों का समाधान निकाला जा सके। मंत्रालय ने यह भी कहा कि बंद और विरोध प्रदर्शन का माहौल क्षेत्र की सामान्य शांति और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है, जिससे छात्रों, नौकरी तलाशने वालों, व्यापारियों और पर्यटन क्षेत्र पर असर पड़ा है।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया में वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर हाल ही में सुनवाई हुई थी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च तक के लिए टाल दी थी। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि वांगचुक के कुछ बयानों से युवाओं को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के लिए प्रेरणा मिल सकती है, जिससे सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में अस्थिरता पैदा होने की आशंका थी।
गौरतलब है कि पिछले साल लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया था। इसी क्रम में लेह एपेक्स बॉडी (LAB) द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें चार लोगों की मौत और करीब 90 लोग घायल हो गए थे। इस घटना के बाद पुलिस ने सोनम वांगचुक को हिरासत में ले लिया था।
अब केंद्र सरकार द्वारा हिरासत खत्म किए जाने के बाद उनके जल्द रिहा होने की संभावना है।