रांची (झारखंड) : झारखंड हाईकोर्ट ने संज्ञेय अपराध के बावजूद प्राथमिकी दर्ज करने में देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। मामले की सुनवाई के दौरान धनबाद के एसएसपी को अदालत में उपस्थित होना पड़ा, जहां उन्होंने देरी के लिए कोर्ट से माफी मांगी।
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि जब किसी गंभीर और संज्ञेय अपराध—जैसे वीडियो वायरल करने की धमकी—की शिकायत सामने आए, तो पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान एसएसपी ने अदालत को आश्वस्त किया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर उसी दिन प्राथमिकी दर्ज कर ली जाएगी। साथ ही यह भी बताया कि संबंधित थाना प्रभारी, जिसने शिकायत पर कार्रवाई नहीं की, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जा रही है और निलंबन की अनुशंसा भी की जाएगी।
क्या है मामला
मामला अपीलकर्ता रवि साव से जुड़ा है, जिसे पहले जमानत मिल चुकी थी। पीड़िता ने उसकी जमानत रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की है। आरोप है कि जमानत पर बाहर आने के बाद आरोपी ने दोबारा अवैध गतिविधियों में संलिप्तता दिखाई और वीडियो वायरल करने की धमकी दी।
पीड़िता द्वारा साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि शिकायत में स्पष्ट रूप से संज्ञेय अपराध का उल्लेख होने के बावजूद पुलिस ने समय पर केस दर्ज नहीं किया।
अदालत का निर्देश
हाईकोर्ट ने धनबाद एसएसपी को निर्देश दिया है कि पूरे मामले में की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट अगली सुनवाई में प्रस्तुत करें। साथ ही उन्हें 11 मई को होने वाली सुनवाई में भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है और दर्ज एफआईआर की जानकारी देने को कहा गया है।
मामले में अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने पक्ष रखा।