रांची (झारखंड) : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पारा शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सहायक शिक्षक और सहायक आचार्य के 50 प्रतिशत आरक्षित पदों पर केवल पारा शिक्षकों (सहायक अध्यापक) से आवेदन लेकर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाये। कोर्ट ने कहा है कि प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित रिक्त पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया चलायी जाये।
जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने राज्य सरकार को वर्तमान शैक्षणिक वर्ष के लिए चार सप्ताह के भीतर रिक्तियों की पहचान करने तथा उसके दो सप्ताह के अंदर विज्ञापन जारी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने 10 सप्ताह के भीतर पूरी नियुक्ति प्रक्रिया समाप्त करने को कहा है। साथ ही अगले शैक्षणिक वर्ष के लिए भी भर्ती का विस्तृत शिड्यूल तय किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड प्राथमिक विद्यालय शिक्षक नियुक्ति नियमावली-2012 तथा झारखंड प्रारंभिक विद्यालय सहायक आचार्य संवर्ग नियमावली-2022 के तहत नियुक्ति प्रक्रिया लागू करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने नियमितिकरण पर क्या कहा
पीठ ने अपने फैसले में कहा कि संविदा या एडहॉक आधार पर नियुक्त शिक्षक केवल लंबी सेवा के आधार पर नियमितिकरण का अधिकार नहीं मांग सकते। ऐसा करने से वैधानिक नियमों से अलग सार्वजनिक भर्ती का समानांतर रास्ता तैयार हो जायेगा।
कोर्ट ने कहा कि जहां पारा शिक्षकों की नियमित सरकारी पद पाने की इच्छा उचित है, वहीं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है। अनुच्छेद 309 के तहत राज्य सरकार को वैधानिक भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों का चयन करने का अधिकार प्राप्त है।
पीठ ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था को अस्थायी व्यवस्था के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। नौकरी में सुरक्षा की भावना किसी भी सेवा की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक है।
डेढ़ लाख शिक्षकों की कमी का हवाला
याचिकाकर्ता सुनील कुमार यादव समेत अन्य की ओर से दायर अलग-अलग एसएलपी में कहा गया था कि झारखंड के 24 जिलों के सरकारी स्कूलों में लगभग डेढ़ लाख सहायक शिक्षकों की कमी है। इसी मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण आदेश दिया।