गोला (रामगढ़), झारखंड : गोला प्रखंड के खीरी मठ मठवाटांड़ स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल पर शुक्रवार को भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन बौद्ध भिक्षु भंते विनयाचार्य ने दीप प्रज्वलित कर और प्रतिमा का अनावरण कर किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
संबोधित करते भंते विनयाचार्य
कार्यक्रम में बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी, भारती कुशवाहा, संतोष चौधरी, बौद्ध भिक्षु कमलेश कुमार सहित कई सामाजिक एवं धार्मिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के बीच खीर भोग का वितरण भी किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए भंते विनयाचार्य ने कहा कि भगवान बुद्ध मानवता, शांति और करुणा के प्रतीक थे। उन्होंने लोगों से पंचशील के सिद्धांतों का पालन करने और जीवन में अहिंसा एवं सद्भाव अपनाने की अपील की। उन्होंने बुद्ध के जीवन, उनके उपदेशों और समाज में उनकी शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि जब भी व्यक्ति मानसिक अशांति या भ्रम की स्थिति में हो, उसे बुद्ध के बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। महिलाओं को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है, ताकि समाज में उन्हें सम्मानजनक स्थान मिल सके।
2200 वर्ष पुराने मठ होने का दावा
भंते विनयाचार्य ने बताया कि खीरी मठ लगभग 2200 वर्ष पुराना माना जाता है और इसका संबंध सम्राट अशोक काल से जुड़ा हो सकता है। उनके अनुसार कलिंग युद्ध के समय सम्राट अशोक ने विभिन्न स्थानों पर हजारों मठों का निर्माण कराया था और यह स्थल भी उन्हीं में से एक प्रतीत होता है।
उन्होंने बताया कि मठ परिसर के आसपास प्राचीन संरचनाएं, धम्म चक्र के अवशेष और पुराने तालाब जैसे चिन्ह मिले हैं, जो इसे ऐतिहासिक बौद्ध स्थल होने की ओर संकेत करते हैं। उनका कहना है कि यदि यहां पुरातात्विक खुदाई कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवशेष सामने आ सकते हैं।
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग
भंते विनयाचार्य ने कहा कि रामगढ़ जिला प्रशासन द्वारा इस स्थल को प्राचीन धरोहर के रूप में चिन्हित किया गया है। इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पुरातत्व विभाग से भी आग्रह किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक पूर्णिमा को यहां खीर भोग वितरण और नियमित पूजा-अर्चना की व्यवस्था की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले इस स्थान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई थीं, जिसके कारण लोग यहां आने से बचते थे। लेकिन सफाई और निरीक्षण के बाद इसकी पहचान एक प्राचीन बौद्ध मठ के रूप में सामने आई है।