रामगढ कैंट / रांची, झारखंड : अधिवक्ता एवं सरकारी अधिवक्ता (गवर्नमेंट प्लीडर) संजीव कुमार अंबष्ठ ने झारखंड के राज्यपाल महामहिम संतोष कुमार गंगवार को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर कोडरमा जिले के सभी महाविद्यालयों को विनोबा भावे यूनिवर्सिटीसे हटाकर सर जेसी बोस यूनिवर्सिटी के अधीन करने संबंधी राज्य सरकार के निर्णय को शीघ्र लागू करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि झारखंड सरकार ने भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक सुविधा, क्षेत्रीय शैक्षणिक विकास और उच्च शिक्षा के संतुलित विस्तार को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया था। इसलिए इसे किसी भी प्रकार के दबाव में बदले जाने के बजाय पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए।
संजीव कुमार अंबष्ठ ने बताया कि वर्तमान में कोडरमा जिले के प्रमुख शिक्षण संस्थान जैसे जेजे कॉलेज, झुमरी तिलैया, ग्रिजली कॉलेज ऑफ एजुकेशन, रामगोविंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सरकारी डिग्री कॉलेज कोडरमा सहित कई बीएड, शिक्षक प्रशिक्षण एवं डिग्री कॉलेज विनोबा भावे यूनिवर्सिटी से संबद्ध हैं। इन संस्थानों को सर जेसी बोस यूनिवर्सिटी से जोड़ने से नवस्थापित विश्वविद्यालय को मजबूती मिलेगी और क्षेत्रीय शिक्षा विकास को नई दिशा मिलेगी।
भौगोलिक दृष्टि से उचित निर्णय
ज्ञापन में कहा गया है कि कोडरमा जिला झारखंड के पूर्वी भाग में स्थित है और इसका गिरिडीह जिले से स्वाभाविक भौगोलिक एवं क्षेत्रीय जुड़ाव है। डोमचांच, मरकच्चो, जयनगर, सतगावां और आसपास के क्षेत्रों के लोगों का आवागमन, व्यापारिक गतिविधियां तथा अन्य प्रशासनिक कार्य भी गिरिडीह क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।
अंबष्ठ के अनुसार कई इलाकों से गिरिडीह तक पहुंचना अपेक्षाकृत सुविधाजनक है, जबकि हजारीबाग तक जाने में अधिक दूरी और यातायात संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद कोडरमा जिले को सर जेसी बोस यूनिवर्सिटी के अधीन लाने का निर्णय लिया था।
प्रशासनिक दक्षता और बेहतर शैक्षणिक प्रबंधन
ज्ञापन में कहा गया है कि नवस्थापित विश्वविद्यालय को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए पर्याप्त संख्या में संबद्ध महाविद्यालयों की आवश्यकता है। यदि कोडरमा के कॉलेजों को इससे नहीं जोड़ा जाता है तो नए विश्वविद्यालय की स्थापना का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इससे विनोबा भावे यूनिवर्सिटी पर वर्तमान प्रशासनिक दबाव भी कम होगा। परीक्षा संचालन, संबद्धता, निरीक्षण, शैक्षणिक निगरानी और विद्यार्थियों से जुड़ी सेवाओं का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। यह उच्च शिक्षा के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
छात्रों और शिक्षा जगत को होगा लाभ
ज्ञापन के अनुसार नए विश्वविद्यालय के माध्यम से विद्यार्थियों को अधिक केंद्रित शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकेंगी। नए विभागों, शोध केंद्रों और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी। विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा गिरिडीह और कोडरमा दोनों जिलों के समग्र शैक्षणिक विकास को गति मिलेगी।
सांसद अन्नपूर्णा देवी के विरोध पर सवाल
संजीव कुमार अंबष्ठ ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि कोडरमा की सांसद एवं केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा कोडरमा के महाविद्यालयों को विनोबा भावे यूनिवर्सिटी के अधीन बनाए रखने की मांग की जा रही है।
उन्होंने कहा कि दूरी और परिवहन व्यय को आधार बनाकर किए जा रहे विरोध से सहमत होना कठिन है, क्योंकि राज्य सरकार पहले ही सभी भौगोलिक, प्रशासनिक और शैक्षणिक पहलुओं का अध्ययन कर निर्णय ले चुकी है।
अंबष्ठ का कहना है कि उच्च शिक्षा से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय राजनीतिक दृष्टिकोण के बजाय वस्तुनिष्ठ तथ्यों, प्रशासनिक सुविधा और विद्यार्थियों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक दबाव के कारण सरकार अपने निर्णय से पीछे हटती है तो इससे नवस्थापित सर जेसी बोस यूनिवर्सिटी की उपयोगिता और उच्च शिक्षा के विकेंद्रीकरण की अवधारणा कमजोर पड़ सकती है।