तोपा परियोजना में रैयत विस्थापित मोर्चा का आंदोलन, आठ घंटे तक ठप रहा आउटसोर्सिंग कार्य और कोयला ढुलाई

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कुजू (रामगढ), झारखंड :  सीसीएल की तोपा परियोजना में रविवार को रैयत विस्थापित मोर्चा के बैनर तले ग्रामीणों ने विभिन्न मांगों को लेकर आउटसोर्सिंग खनन कार्य एवं हाइवा से ई-आक्शन कोयले की ढुलाई रोक दी। आंदोलन के कारण परियोजना क्षेत्र में खनन कार्य और कोयला परिवहन कई घंटों तक प्रभावित रहा। हालांकि बाद में वार्ता और लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त कर कामकाज पुनः शुरू कर दिया गया।

सुबह से ही एक दर्जन से अधिक गांवों के विस्थापित एवं प्रभावित ग्रामीण खान क्षेत्र के निकट जुट गए और आउटसोर्सिंग कंपनी के कार्य का विरोध शुरू कर दिया। आंदोलन का नेतृत्व तोपा परियोजना लोकल सेल संचालन समिति के अध्यक्ष सह रैयत विस्थापित मोर्चा के नेता राजेश्वर गंझू, सचिव मो. अलियास तथा रामभजनलाल महतो कर रहे थे।

आंदोलनकारियों में गोपेश्वर करमाली, ज्योतेंद्र प्रसाद साहू, असगर अली, गिरधारी बेसरा, बिनोद महतो, मो. अली, ज्ञानी महतो, प्रकाश गंझू, अनवर अली समेत कई ग्रामीण शामिल थे। आंदोलनकारियों का कहना था कि बनवार, तोपा, ठाकुरगोड़ा, तोयरा, न्यू मंगरदाहा, ओरला, हुवाग, केरीबंदा सहित 19 गांवों के रैयत, विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों को उनका अधिकार अब तक नहीं मिला है।

ग्रामीणों ने मांग की कि ई-आक्शन कोयले की ढुलाई हाइवा के बजाय ट्रकों से कराई जाए। साथ ही पूर्ण रैयत, विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों के सदस्यों को आउटसोर्सिंग कंपनी में रोजगार दिया जाए। पुनर्वासित स्थलों पर सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा जमीन के बदले नौकरी और मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए।

आंदोलनकारियों ने तोपा परियोजना के चेकनाका को जाम कर दिया, जिससे हाइवा के माध्यम से होने वाली कोयला ढुलाई पूरी तरह ठप हो गई। वहीं दूसरी ओर हाइवा से कोयला ढुलाई से जुड़े स्थानीय रैयत, विस्थापित एवं प्रभावित मजदूरों के एक समूह ने लोकल सेल में कोयला लोडिंग के लिए पहुंचे ट्रकों को रोक दिया। इससे परियोजना क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई।

स्थिति को देखते हुए सीसीएल के सुरक्षा विभाग ने हस्तक्षेप किया और आंदोलनकारियों तथा खनन कंपनी के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता कराई। वार्ता के दौरान खनन कंपनी के प्रतिनिधि अनूप कुमार ने 20 जून को परियोजना प्रबंधन के साथ विस्तृत बैठक कराने का लिखित आश्वासन दिया।

लिखित आश्वासन मिलने के बाद करीब आठ घंटे तक चले आंदोलन को समाप्त कर दिया गया और दोनों पक्षों ने ट्रकों, हाइवा तथा आउटसोर्सिंग कंपनी के कार्य को सुचारू रूप से चालू करने पर सहमति जताई।

आंदोलन में अखिलेश महतो, आदिल, भगीरथ महतो, बिनोद कुमार, कामेश्वर महतो, अरुण कुमार, दानिश, खिरोधर महतो, श्याम सुंदर करमाली, बड़कू मांझी, महावीर मांझी, अशरफ जिया, ललित राम, सोमर गंझू, बेनीराम मांझी, माशूक अली, गुरुचरण बेसरा, सोएब रजा, शक्ति मांझी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।